Cji सूर्यकांत ने ताजा की यादें:जब हांसी से गुजरता हूं, बचपन याद आता है; पहली बार सिनेमाघर में यहीं देखी फिल्म - Cji Suryakant Reminisces: When I Pass Through Hansi, I Remember My Childhood
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हांसी से जुड़ी यादें ताजा करते हुए कहा कि मैं जब भी कभी हांसी से गुजरता हूं बचपन याद आता है। बचपन की यादें इस शहर से जुड़ी हैं। पिता के साथ पहली बार सिनेमाघर में यहीं फिल्म देखी थी। न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में उन्होंने बचपन से सीजेआई बनने तक का सफरनामा सामने रखा। न्यायाधीश के रूप में 22 वर्ष पूरे होने की बात सबसे पहले हांसीवासियों के सामने कही।
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उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने पिता के साथ हांसी के सिनेमाघर में फिल्म देखी थी। 20 अप्रैल 1984 को उनकी लॉ की अंतिम परीक्षा थी और 21 अप्रैल 1984 से उन्होंने हिसार कोर्ट में वकालत शुरू कर दी। 29 जुलाई को उन्हें वकालत का लाइसेंस मिला। इसके बाद उन्हें हिसार के नामी वकीलों के साथ चंडीगढ़ के उच्च न्यायालय में भी वकालत करने का अवसर मिला।
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तब जज ने कहा था...इस युवक का भविष्य खराब न करके इसे उच्च न्यायालय में भेज दो
सीजेआई ने बताया कि उनके पिता कुछ समय के लिए हांसी में तैनात रहे। यहां स्कूल में उनका दाखिला करवाया गया। हांसी के सिनेमाघर में ही पहली बार फिल्म देखी थी। तब उनके पिता साइकिल पर बिठा कर उन्हें लेकर गए थे। उन्होंने बताया कि लॉ की पढ़ाई के बाद परिजनों ने उन्हें कोर्ट में जाने के लिए कहा था। 21 अप्रैल 1984 से हिसार कोर्ट में वकालत शुरू की थी। उसके बाद 29 जुलाई 1984 में उन्हें लाइसेंस मिला। उन्होंने कहा कि एक बार कोर्ट में नामी वकील के सामने केस की बहस की थी। तब जज ने फैसला सुनाते हुए उनके बारे में कहा था कि इस युवक का भविष्य खराब न करके इसे उच्च न्यायालय में भेज दो। इसके बाद नामी वकील अपने साथ उन्हें चंडीगढ़ के साथ गए। अटैची में दो कपड़े डालकर वह चंडीगढ़ चले गए। हिसार में दो वकीलों का पूरा आशीर्वाद मिला था।
पत्नी को विशेष अतिथि बताया
समारोह में जज मंच पर बैठे जजों व बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का नाम ले रहे थे तो उन्होंने अपनी पत्नी सविता को विशेष अतिथि कहकर सबको गुदगुदाया। उन्होंने कहा कि कहीं नाम लेने से चूक न जाएं और मुश्किल हो जाए इसलिए नाम लिया है।
पिता की फोटो देख भावुक हुए
स्थानीय लोक निर्माण विश्राम गृह में पहुंचने पर सीजेआई को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। मंच पर बार एसोसिएशन के प्रधान पवन रापड़िया ने उन्हें भगवान श्रीराम का मूर्ति भेंट की। डीसी डॉ. राहुल नरवाल ने सीजेआई को उनका चित्र भेंट किया। इस दौरान एसडीएम राजेश खोथ ने सीजेआई को उनके पिता मदन गोपाल शास्त्री की हाथ से बनी हुई फोटो भेंट की जिसे देख सीजेआई भावुक हुए व फोटो को माथे से लगाया। एसडीएम ने पहली बार सीजेआई के पिता को ही अपनी कविता सुनाई थी। यह एसडीएम के लिए भी यादगार थी। एडवोकेट पारिशा राजपाल ने उच्च न्यायालय की जज अल्का सरीन का स्वागत किया।
हांसी मेरी जन्म व कर्म भूमि : सीजेआई
हांसी मेरी जन्म व कर्म भूमि है। सीजेआई ने कहा कि मैं हांसी से भावना से जुड़ा हुआ हुं। शपथ ग्रहण के समय भी हांसी के वकील व परिवार के सदस्य वहां उपस्थित थे।
जिला बनने से पुरानी मांग हुई पूरी
सीजेआई ने कहा कि हांसी को जिला बनाने से पुरानी मांग पूरी हुई है। इसके लिए उन्होंने सभी को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि जब हांसी कोर्ट परिसर का नया भवन बना था। वह तब यहां आए थे। तब भी यहां हांसी को जिला बनाने की मांग उठी थी। उन्होंने कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा और विधायक विनोद भयाना के सामने कहा कि पहले लोग कहते थे कि हांसी जिला नहीं बनता है तो यहां पर सेशन कोर्ट बना दें।
हांसी जिस रफ्तार से बोझ बढ़ा, वैसा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बना
मंच पर वकीलों को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि पहले कोर्ट परिसर की ऐसी व्यवस्था होती थी कि जहां ज्यूडिशियल अधिकारी, महिला वकीलों के लिए शौचालय तक नहीं थे। वकीलों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। धीरे धीरे देश ने प्रगति कर न्यायिक व्यवस्था का इंफ्रास्ट्रक्चर भी बदला। हरियाणा ने देश में न्यायिक व्यवस्था में अच्छा नाम कमाया है। सभी सेशन व उपमंडल स्तरीय कोर्ट में अच्छे कोर्ट परिसर हैं। जिस रफ्तार से न्यायिक व्यवस्था पर बोझ बढ़ा है उस रफ्तार के हिसाब से अभी तक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बन पाया है।