कहीं समय से पहले न आ जाए नन्हा मेहमान:गर्भवती महिलाएं सावधान, ठंड और प्रदूषण की काली नजर से खुद को बचाएं - Cold And Pollution Increasing Risk Of Premature Birth Of Baby In Womb
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बढ़ते ठंड और प्रदूषण को लेकर डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को चेतावनी दी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बहुत ज्यादा ठंड और प्रदूषण के संपर्क में आने से समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है और गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड की लहर जारी है, जिसके कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। ऐसे में कई इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 10 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया। ऐसे में अध्ययन के अनुसार, ठंड के संपर्क में आने से शरीर में स्ट्रेस से जुड़े हार्मोनल सिस्टम एक्टिव हो जाते हैं, जैसे कि सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम और रेनिन-एंजियोटेंसिन सिस्टम। ये दोनों ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करने में भूमिका निभाते हैं और इनडायरेक्ट रूप से भ्रूण के विकास पर असर डाल सकते हैं।
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क्या कहते हैं डॉक्टर
गायनेकोलॉजिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनीता सभरवाल के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को रूखी त्वचा, नाक बंद होने और इम्यूनिटी में बदलाव होने का खतरा ज्यादा होता है और ठंड का मौसम इन समस्याओं को और बढ़ा देता है। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें वायरल इन्फेक्शन होने का खतरा भी ज्यादा होता है। सर्दियों में प्यास कम लगने से पानी का सेवन कम होता है। ठंड के मौसम और भारी कपड़ों के कारण आलस बढ़ जाता है और एक्सरसाइज करने का मन नहीं करता। इन सब कारणों से आसानी से थकान, जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न और दर्द और कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत और ब्रोंकाइटिस के मामले बढ़ जाते हैं। अध्ययन के अनुसार, ज्यादा प्रदूषण की वजह से समय से पहले जन्म और छोटे बच्चों का खतरा बढ़ जाता है।
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जरूरतों के हिसाब से एक्सरसाइज में बदलाव करें
डॉ. सभरवाल ने कहा कि हेल्दी न्यूट्रिशन बनाए रखने, हाइड्रेशन बेहतर करने और प्रेग्नेंसी और मौसम की जरूरतों के हिसाब से एक्सरसाइज में बदलाव करने के लिए परिवार, ऑब्स्टेट्रिशियन और महिलाओं के हेल्थ एजुकेटर से बात करना जरूरी है, ताकि डिलीवरी का अनुभव अच्छा हो। विशेषज्ञों के अनुसार, इंसान का शरीर गर्मी बचाने के लिए खून की नसों को सिकोड़कर ठंड पर प्रतिक्रिया करता है। उन्होंने बताया कि हालांकि यह एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है, लेकिन प्रेग्नेंसी पहले से ही सर्कुलेटरी सिस्टम पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है और समझाया कि जब ब्लड वेसल्स और टाइट हो जाती हैं, तो ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे प्रेग्नेंसी से जुड़े हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती के लिए ज्यादा खतरनाक
अध्ययन के अनुसार, दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने को कम वजन वाले बच्चे होने के ज्यादा जोखिम से जोड़ा गया है। ऐसे में प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ज्यादा ठंड भी समय से पहले जन्म के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है। ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. स्वप्निल अग्रहरि ने बताया कि जब प्लेसेंटल ब्लड फ्लो कम हो जाता है, तो बच्चे को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उसकी ग्रोथ धीमी हो सकती है। इसलिए सर्दियों में गर्भवती महिलाओं के लिए गर्मी बनाए रखना और ओवरऑल हेल्थ का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इसके अलावा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बात पर ज़ोर दिया कि लगातार सिरदर्द, सूजन या ब्लड प्रेशर में अचानक बढ़ोतरी जैसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टरों की सलाह
मौसमी फ्लू का टीका लगवाएं, प्रदूषण या फ्लू फैलने के समय भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और प्रदूषित या भीड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें। बार-बार हाथ धोएं और बुखार, लगातार खांसी या सांस फूलने पर जल्दी डॉक्टर से सलाह लें। भारतीय महिलाओं में विटामिन डी की कमी आम है, जो सर्दियों में और भी बढ़ जाती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपने चेहरे और बांहों पर 15 से 20 मिनट तक धूप लेनी चाहिए। डॉक्टरों द्वारा बताए गए सप्लीमेंट्स लेने चाहिए और कमी का जल्दी पता लगाने के लिए रेगुलर एंटीनेटल चेकअप करवाना चाहिए। गर्म रहने, छह से आठ घंटे की नींद लेने, भ्रूण का वजन बढ़ाने के लिए हाई-प्रोटीन डाइट लेने से इन जोखिमों को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।