Da Hike:केंद्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते में 2-3% वृद्धि की उम्मीद, क्या सूचकांक की इस 'चाल' से डीए की दर हो - Da Hike: Central Government Employees Can Expect A 2-3 Percent Increase In Dearness Allowance

Da Hike:केंद्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते में 2-3% वृद्धि की उम्मीद, क्या सूचकांक की इस 'चाल' से डीए की दर हो - Da Hike: Central Government Employees Can Expect A 2-3 Percent Increase In Dearness Allowance

केंद्र सरकार ने पिछली बार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके चलते जुलाई 2025 से लागू हुए डीए/डीआर की दर 58 पर पहुंच गई थी। अब पहली जनवरी 2026 से डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होनी है। फिलहाल अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) की रिपोर्ट, डीए की दरों में दो से तीन फीसदी की वृद्धि होने के संकेत दे रही है। जुलाई 2025 में सूचकांक 146.5 पर था तो नवंबर में 148.2 पर पहुंच गया है। अभी दिसंबर की रिपोर्ट आना बाकी है। दूसरी तरफ दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.33 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी। ऐसे में महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दर 60 के पार हो सकती है। 

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बता दें कि मार्च 2025 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 140.1 पर रहा था। अप्रैल में सूचकांक 140.6 रहा तो मई 2025 में 144.0 था। उसके बाद जून 2025 में यह सूचकांक 145.0 पर रहा था। जुलाई में 146.5, अगस्त 2025 में 147.1, सितंबर 2025 में  147.3, अक्टूबर 2025 147.7 और नवंबर 2025 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) 148.2 रहा है। अभी दिसंबर 2025 की रिपोर्ट आना बाकी है।  विज्ञापन विज्ञापन

रसोई के जरूरी सामानों, खासकर सब्जियों और प्रोटीन युक्त वस्तुओं के दामों में वृद्धि के चलते दिसंबर 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में बढ़कर 1.33 प्रतिशत हो गई। इससे पहले सितंबर में महंगाई दर 1.44 प्रतिशत के स्तर पर थी। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू) से डीए व डीआर की दर 60 के आंकड़े को पार करने का संकेत दे रही है। नवंबर के सूचकांक में भारत के औद्योगिक केंद्रों में महंगाई को बढ़ते हुए दर्शाया गया है। 

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय, श्रम ब्यूरो, देश के 88 औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों में फैले 317 बाजारों से एकत्रित खुदरा मूल्यों के आधार पर हर महीने औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) संकलित करता है। नवंबर 2025 के लिए अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू में 0.5 अंक की वृद्धि हुई। यह 148.2 पर पहुंच गया। नवंबर 2025 में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.56 प्रतिशत रही थी, जबकि नवंबर 2024 में यह दर 3.88 प्रतिशत थी। 

डीए/डीआर की दर जब पचास फीसदी के पार हो जाती है तो नियमानुसार डीए/डीआर को मूल वेतन और पेंशन में विलय कर दिया जाए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि सरकार, ऐसा कोई विलय नहीं करेगी। नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने का कहना है कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने पहले ही कर्मचारियों का दस प्रतिशत पैसा हर माह बचा लिया है। इसे यूं भी कह सकते हैं कि पिछले दो साल से दस प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों का वेतन हड़पा जा रहा है। पेंशन भी हड़पी जा रही है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद भी दो साल बाद ही कर सकते हैं। ऐसे में चार साल तक कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ेगा। अब सरकार कह रही है कि डीए को मूल वेतन में मर्ज नहीं करेंगे। बतौर पटेल, सरकार, कर्मचारी को उसका आर्थिक फायदा देने से क्यों कतरा रही है।  

कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने पिछले साल संसद के बजट सत्र से पहले कैबिनेट सचिव को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने महंगाई भत्ता/महंगाई राहत यानी 'डीए/डीआर' की गणना का कैलकुलेटर बदलने की मांग की थी। डीए की दर तय करने के लिए 12 महीने के औसत को तीन महीने के औसत से बदला जाना चाहिए। मतलब, परिवर्तनीय डीए दिया जाए। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को हर तीन महीने में वास्तविक मूल्य वृद्धि से मुआवजा मिल सकेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों का डीए इसी आधार पर तय होता है। इतना ही नहीं, केंद्रीय कर्मियों और पेंशनरों के लिए अलग से 'उपभोक्ता मूल्य सूचकांक' तैयार करने की मांग की गई है। 

यादव के अनुसार, बैंकिंग कर्मचारियों का डीए हर साल प्रत्येक तिमाही यानी फरवरी-अप्रैल, मई-जुलाई, अगस्त-अक्टूबर और नवंबर-जनवरी में संशोधित किया जाता है। यदि जनवरी में मूल्य वृद्धि हो रही है, तो इसकी आंशिक भरपाई 12 महीनों के बाद की जाती है। डीए की गणना और भुगतान छह महीने के बजाय हर तीन महीने में किया जाना चाहिए। पॉइंट टू पॉइंट डीए प्रदान किया जाना चाहिए। अब डीए को न्यूनतम मूल्य पर राउंड ऑफ किया जाता है। जैसे हम 42.90% डीए के लिए पात्र हैं तो हमें केवल 42% डीए स्वीकृत किया जाता है। 0.9% डीए से केंद्रीय कर्मचारियों को छह महीने तक वंचित किया जाता है। केंद्र सरकार के कर्मियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए प्रदान किया जाना चाहिए। बैंकों और एलआईसी के कर्मचारियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए मिलता है। कर्मियों और पेंशनभोगियों के लिए अलग से उपभोक्ता सूचकांक का निर्माण करने की मांग की गई है। 

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