Dehradun:डब्लूआईआई में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र का लोकार्पण, पाटिल बोले-नदी केवल जलधारा नहीं, जीवनधारा - National River Research Center Inaugurated At Wii Patil Said River Is Not Just A Stream Of Water It Is Lifelin

Dehradun:डब्लूआईआई में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र का लोकार्पण, पाटिल बोले-नदी केवल जलधारा नहीं, जीवनधारा - National River Research Center Inaugurated At Wii Patil Said River Is Not Just A Stream Of Water It Is Lifelin

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केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि नदी को केवल जलधारा नहीं बल्कि जीवन धारा मानकर देखना होगा। नदी संरक्षण का काम सिर्फ सरकारी नहीं, अब यह राष्ट्रीय संकल्प व जन आंदोलन बन चुका है। नदी की स्वच्छता एवं जैवविविधता का संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता है। केंद्रीय मंत्री ने  भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई यानी वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया) परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दाैरान कही। इस दाैरान उन्होंने राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र-गंगा जलीय जीव संरक्षण एवं अनुश्रवण केंद्र का लोकार्पण भी किया।

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उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान परिसर में निर्मित नया केंद्र नदी संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और जैव-विविधता संवर्द्धन के राष्ट्रीय प्रयासों को एक नई दिशा देने के साथ ऊर्जा का संचार करेगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान की संकाय अध्यक्ष डॉ. रुचि बडोला ने गंगा व जैवविविधता संरक्षण परियोजना के तहत अब तक की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। कार्यक्रम में उत्तराखंड, हिमाचल, बिहार, झारखंड आदि जगहों से आए गंगा प्रहरियों ने भी अनुभवों को साझा किया। विज्ञापन विज्ञापन

केंद्रीय मंत्री पाटिल ने गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना रिपोर्ट जारी की। साथ ही मिलेटस फार लाइफ और टीएसए फाउंउेशन इंडिया के माध्यम से तैयार की गई उत्तर प्रदेश में गंगा नदी घाटी के अंतर्गत संकटग्रस्त कछुओं का संरक्षण, पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास रिपोर्ट का भी विमोचन किया।

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डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
जलशक्ति मंत्री पाटिल ने आधुनिक संसाधनों से लैस डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने संस्थान में स्थित विभिन्न प्रयोगशालाओं का निरीक्षण करने के साथ वहां चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की। एमएससी विद्यार्थियों, शोधर्थियों एवं परियोजना प्रतिनिधियों के साथ गंगा संरक्षण, जलीय जैवविविधता, सामुदायिक सहभागिता तथा आजीविका आधारित संरक्षण मॉडलों पर विचार- विमर्श भी किया।

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