Delhi:अब सरकारी स्कूलों के संचालन में जनता की भागीदारी, एक अप्रैल से समग्र शिक्षा अभियान 3.0 में रिफॉर्म - Samagra Shiksha Abhiyan 3.0 Now, Public Participation In The Management Of Government Schools

Delhi:अब सरकारी स्कूलों के संचालन में जनता की भागीदारी, एक अप्रैल से समग्र शिक्षा अभियान 3.0 में रिफॉर्म - Samagra Shiksha Abhiyan 3.0 Now, Public Participation In The Management Of Government Schools

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अब सरकारी स्कूलों के संचालन में अभिभावकों के साथ जनता की भी भागीदारी होगी। एक अप्रैल से समग्र शिक्षा 3.0 की रिफॉर्म के साथ शुरुआत हो रही है। इसमें विकसित भारत 2047 और छात्रों की जरूरतों के आधार पर स्कूलों को समाज से जोड़ने पर काम होगा। सरकारी स्कूलों की मैनेजमेंट कमेटी में पहली बार अभिभावकों, आम लोग को सदस्य के रूप में जोड़ा जाएगा। यह पढ़ाई, खेल, कौशल, फीस, तनाव ओर ड्रॉपआउट रोकने, शिक्षकों की ट्रेनिंग पर  सुझाव देंगे। केंद्र सरकार और राज्यों के मुख्य सचिवों की शुक्रवार को बैठक आयोजित हुई। 

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पांच साल के बाद वर्ष 2026-27 में हम समग्र शिक्षा के एक नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं। व्यवस्था और तनख्वाह सरकार का दायित्व हो, लेकिन, संचालन का दायित्व समाज का हो। स्कूलों में अभिभावकों के अलावा स्थानीय लोगों व प्रतिनिधियों को जोड़ना होगा। इसके लिए एक बार, फिर स्कूलों को समाज को लौटाना होगा। प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का विज़न दिया है। आज हमारे सामने विकसित भारत की ढांचागत शिक्षा व्यवस्था और मानव बल तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती है। हमारी अमृत पीढ़ी को मैकाले की सोच से बाहर निकालना और विकसित भारत के लिए ह्यूमन कैपिटल तैयार करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।  विज्ञापन विज्ञापन

11 राज्यों ने भाग लिया
बैठक में दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश,जम्मू-कश्मीर, असम, पंजाब, त्रिपुरा, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना व महाराष्ट्र के मुख्य व शिक्षा सचिव व शिक्षा विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

छात्र, शिक्षकों का समग्र विकास होगा
सरकार का फोकस, अब गुणवता और समानता से आगे है। यानी, समग्र शिक्षा को एक बड़े एक्सेस स्कीम से बदलकर एनईपी 2020 के तहत तालमेल बिठाते हुए, नतीजों पर आधारित, क्वालिटी पर फोकस करने वाले फ्रेमवर्क में बदलना होगा। इसमें  सीखने व पोषण के नतीजों को बेहतर बनाना, परीक्षा का तनाव, शिक्षा के अंतर व ड्राॅपआउट कम करना, शिक्षा व पोषण के परिणामों में सुधार, 12वीं कक्षा तक 100 फीसदी एडमिशन हासिल करना व स्कूलों को प्रौद्योगिकी से जोड़ने पर काम होगा। इसके अलावा शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना, हर बच्चे में डिज़ाइन थिंकिंग और ज़रूरी स्किल्स को बढ़ावा देना भी शामिल है।

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