Delhi Assembly:हंगामे की भेंट चढ़ा शीतकालीन सत्र, आखिरी दिन अव्यवस्था के आरोप में आप के चार विधायक निलंबित - Delhi Assembly: Winter Session Marred By Uproar

Delhi Assembly:हंगामे की भेंट चढ़ा शीतकालीन सत्र, आखिरी दिन अव्यवस्था के आरोप में आप के चार विधायक निलंबित - Delhi Assembly: Winter Session Marred By Uproar

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विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में जो भी वादे किए हैं, उन्हें हर हाल में पूरा किया जाएगा। फरवरी में भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली में बरसों से छाया अंधकार छंटा है और अब पूरी टीम शॉर्ट टर्म व मिड टर्म योजनाओं के जरिये राजधानी को विकास की सही दिशा में आगे बढ़ा रही है। हंगामे के बीच बाधित रहे सत्र को एक दिन बढ़ाकर शुक्रवार को सार्थक बनाया गया, जब दिल्ली से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

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विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी को शुरू हुआ था, लेकिन उपराज्यपाल के अभिभाषण के पहले दिन से ही शुरू हुए हंगामे के कारण चार दिन बेकार चले गए। इसके बाद सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाया गया। शुक्रवार को नियम 280 के तहत कई विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे, दिल्ली का प्रदूषण, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा हुई। हालांकि आखिरी दिन भी आप का हंगामा जारी रहा। सदन में अव्यवस्था फैलाने के आरोप में आप के चार विधायक सोम दत्त, जरनैल सिंह, संजीव झा और कुलदीप कुमार को पूरे सत्र के लिए सुबह ही निलंबित कर दिया गया। इसके बाद आम आदमी पार्टी के अन्य सदस्यों ने वॉकआउट किया, हालांकि कुछ विधायक बाद में वापस लौटे। वहीं सदन के बाहर आप विधायकों ने प्रदर्शन कर सरकार पर गुरुओं के पीछे छिपकर राजनीति करने का आरोप लगाया। विज्ञापन विज्ञापन

आतिशी तीसरे दिन भी सदन से गायब रहीं
सदन में हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी लगातार तीसरे दिन भी सदन से गायब रहीं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती और अगर हंगामा जारी रहा तो और कार्रवाई होगी। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि सत्ता पक्ष की ओर से नियम 280 पर चर्चा के लिए 16 सदस्यों के नाम आए, जबकि आप की ओर से केवल एक नाम दिया गया, जो विपक्ष की उदासीनता दिखाता है।

धन्यवाद प्रस्ताव में निशाने पर पिछली सरकार
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। कुलवंत राणा ने कहा कि दिल्ली का स्वरूप बिगाड़ने में कांग्रेस की बड़ी भूमिका रही और 1958 में बना डीडीए जनहित के बजाय व्यापारिक संस्था बन गया। भाजपा सरकार के दौर में मेट्रो आई और सड़कों में सुधार हुआ, लेकिन 11 साल की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया। रवि कांत ने कहा कि उपराज्यपाल ने विकसित दिल्ली का स्पष्ट ब्लूप्रिंट दिया है। अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार ने ऑड-ईवन, स्मॉग टावर और रेड लाइट ऑन-गाड़ी ऑफ जैसे अभियानों पर भारी प्रचार किया, जबकि मौजूदा सरकार ने 11 महीनों में प्रदूषण के खिलाफ जमीन पर काम किया। उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि एलजी के सहयोग से भाजपा सरकार ने दस महीनों में दिल्ली के विकास को गति दी है। विपक्ष की ओर से अनिल झा और विरेंद्र सिंह काद्यान ने सरकार पर सवाल उठाए और आयुष्मान कार्ड, स्कूल, बसों, पानी और कूड़े के पहाड़ों को लेकर आंकड़े मांगे। संजय गोयल ने जवाब में कहा कि एलजी ने 70 बिंदुओं में 70 काम गिनाए हैं और दिल्ली को लूटकर बाहर चुनाव लड़ने वालों पर जनता ने भरोसा तोड़ा है।

अभिभाषण डिलिवरी ओरिएंटेड रोडमैप : सूद
धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि उपराज्यपाल का अभिभाषण सिर्फ योजनाओं की सूची नहीं, बल्कि डिलिवरी ओरिएंटेड सरकार का रोडमैप है। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी 36 लाख बच्चे सरकार की जिम्मेदारी हैं और अब फीस को लेकर धरना नहीं देना पड़ेगा।

ढेर सारे विकास कार्य जल्द दिखेंगे - रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 महीनों में 19 हजार लोगों को आयुष्मान योजना से इलाज मिला है। दिल्ली में 1100 आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे, 29 जन औषधि केंद्र शुरू हुए हैं और पांच अस्पतालों के नए ब्लॉक खोले गए हैं। उन्होंने बताया कि 100 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरण लगाए गए, 1300 नर्सिंग स्टाफ भर्ती हुए और मानदेय 500 से बढ़ाकर 13,500 रुपये किया गया। सीएम ने कहा कि एमसीडी की बुक प्रॉपर्टी पर बिजली-पानी के कनेक्शन दिए जा रहे हैं, सभी सड़कों की कार्पेटिंग होगी और आने वाले समय में डीटीसी बसों में केवल डिजिटल टिकट चलेंगे। उन्होंने कहा कि अब कोई भी काम बजट के कारण नहीं रुकेगा। 15 हजार करोड़ रुपये कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए उपलब्ध हैं।

इन विषयों पर भी हुई चर्चा
सत्र के दौरान कार्यमंत्रणा समिति और विशेषाधिकार समिति के प्रतिवेदन सर्वसम्मति से पास हुए। तथाकथित फांसी घर मामले में भी विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट सदन में रखी गई, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के समिति के सामने पेश न होने को सदन की अवमानना माना गया। साथ ही कोर्ट फीस संशोधन और जन विश्वास विधेयक समेत अन्य विधेयक भी पारित किए गए।

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