Demand for Spiritual Tourism Status for Adi Shakti Maa Bhagwati Temple in Bangaon Grows बोले सहरसा : भगवती स्थान बने पर्यटन स्थल, बढ़ाई जाएं सुविधाएं, Bhagalpur Hindi News
बनगांव स्थित आदि शक्ति मां भगवती स्थान को आध्यात्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग अब तेज होती जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह स्थल अपनी प्राचीनता, सिद्ध पीठ की मान्यता और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटन विभाग के मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है, बावजूद इसके आज तक इसे पर्यटन मानचित्र में स्थान नहीं मिल पाया है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां विराजमान मां भगवती शांति एवं वरदान देने वाली हैं। प्रतिमा का स्वरूप अत्यंत दुर्लभ है, जहां एक हाथ में वरदान मुद्रा और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित है।
जानकारों का कहना है कि ऐसा स्वरूप बहुत कम धार्मिक स्थलों पर देखने को मिलता है, जो इसे विशिष्ट आध्यात्मिक पर्यटन स्थल बनाने की क्षमता रखता है। ग्रामीणों के अनुसार, प्राचीन काल में बनगांव के लोग शक्ति उपासक थे और प्रतिदिन पांच से छह किलोमीटर दूर महिषी स्थित आदि शक्ति मां उग्रतारा की पूजा के लिए जाया करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर 9वीं-10वीं शताब्दी के बीच मां भगवती ने स्वप्न के माध्यम से दर्शन दिए। इसके बाद विशेष पूजा-अनुष्ठान के साथ गौरदह चौर से प्रतिमा लाकर बनगांव में स्थापित की गई। तभी से यह स्थल आस्था का केन्द्र बन गया। गांव की धर्मनिष्ठ महिला बुचनी देवी द्वारा सबसे पहले मां भगवती के लिए पक्का भवन बनवाया गया था। बाद में 1984 के दशक में ग्रामीणों के सहयोग से लाखों रुपए की लागत से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। वर्ष 1988 में स्थानीय श्रद्धालु द्वारा परिसर में मां काली का अलग मंदिर बनवाया गया, जहां तब से नियमित रूप से काली पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि शारदीय नवरात्र, महाष्टमी और काली पूजा के अवसर पर यहां दूर-दूर से हजारों लोग पहुंचते हैं। महाष्टमी के दिन सैकड़ों छागड़ और दर्जनों भैंसों की बलि दी जाती है। इतनी बड़ी धार्मिक गतिविधि के बावजूद प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव खटकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने आज तक इस स्थल के विकास को लेकर कोई ठोस योजना नहीं बनाई। यहां न तो शौचालय की समुचित व्यवस्था है और न ही पर्याप्त प्रकाश। विशेष रूप से बाहर से आने वाली महिला श्रद्धालुओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। बनगांव चौक से मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। बरसात के मौसम में जल निकासी की व्यवस्था न होने से रास्ते कीचड़मय हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसे पर्यटन स्थल घोषित किया जाए, तो सड़क, नाला, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था स्वतः प्राथमिकता में आएगी। संपर्क मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे और सूचना बोर्ड लगाए जाएं मुगल काल की वह मान्यता, जिसमें मौत की सजा पाए एक श्रद्धालु की हथकड़ी यहां स्वतः खुल गई थी, आज भी लोगों की आस्था का विषय है। लेकिन लिखित संकलन और सरकारी संरक्षण के अभाव में यह विरासत लुप्त होती जा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे वर्षों से अपने स्तर से मंदिर का रखरखाव कर रहे हैं, लेकिन अब यह जिम्मेदारी केवल समाज के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। उनका मानना है कि यदि पर्यटन विभाग इसे आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करता है, तो इससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव होगा।स्थानीय श्रद्धालुओं की एकजुट मांग है कि आध्यात्मिक पर्यटन स्थल घोषित कर इसके विकास की दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए। श्रद्धालुओं ने मांग है कि मंदिर परिसर और संपर्क मार्गों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा बनगांव चौक और गोसाई जी कुटी के पास सूचना बोर्ड लगाए जाए, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन मिल सके। बुद्धिजीवियों का कहना है कि इस स्थल से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं आज भी मौखिक में जीवित हैं। शिकायत 1. इसे अब तक आध्यात्मिक पर्यटन स्थल की सूची में शामिल नहीं किया गया है। इससे विकास की योजनाए तैयार नहीं हो पाई हैं। 2. यहा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। पेयजल, शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। 3. राज्य व जिला स्तर पर इस स्थल को पहचान नहीं मिल सकी है। डिजिटल माध्यमों पर भी इसकी जानकारी सीमित है। 4. मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण अब तक नहीं हुआ है। प्रवेश मार्ग, परिसर व आसपास के क्षेत्र अव्यवस्थित दिखाई देते हैं। 5. आध्यात्मिक स्थल के विकास के लिए अब तक सरकारी पहल नहीं हुई है। न तो दीर्घकालिक योजना बनाई गई सुझाव 1. मंदिर के विकास के लिए पर्यटन स्थल घोषित किया जाना जरूरी है। सूची में शामिल होने से योजनाओं का लाभ मिलेगा 2. मंदिर तक आने वाले मुख्य और ग्रामीण पथों पर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कर सड़कों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। 3. मंदिर परिसर में चारों ओर उचित प्रकाश की व्यवस्था की जानी चाहिए। रात्रिकालीन में श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है। 4. बाहरी श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन में कठिनाई होती है। बनगांव चौक और गोसाई जी कुटी परिसर में सूचना बोर्ड लगाए जाने चाहिए। 5. मंदिर से जुड़ी घटनाओं और मान्यताओं का संकलन हो। लिखित और डिजिटल रूप में इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। हमारी भी सुनो- 1.बनगांव स्थित भगवती स्थान एक प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल है। यह वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। स्थल की महत्ता केवल धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक भी है। इसे आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इससे इसकी पहचान व्यापक स्तर पर स्थापित होगी। - बच्चाकांत मिश्र 2.बनगांव स्थित भगवती स्थान को सिद्ध पीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह मान्यता क्षेत्रीय श्रद्धालुओं में गहरी आस्था का आधार है।सिद्ध पीठ होने के बावजूद इसे पर्यटन सूची में शामिल नहीं किया गया है। आध्यात्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा मिलना आवश्यक है।इससे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। - बीरबल झा 3.पर्यटन स्थल के रूप में विकास से स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।धार्मिक परंपराए और लोक आस्थाए संरक्षित होंगी।सांस्कृतिक आयोजनों को नई पहचान मिलेगी। स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ेगी।क्षेत्र की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। - चंदन झा 4.मंदिर तक आने वाले सभी ग्रामीण मार्गों की स्थिति दयनीय है। बारिश के मौसम में कई मार्ग कीचड़मय हो जाते हैं।जल निकासी की उचित व्यवस्था का अभाव है।श्रद्धालुओं को आवागमन में कठिनाई होती है।सभी मार्गों को दुरुस्त किया जाना आवश्यक है। - चंडी प्रसाद झा 5.यहां वर्ष भर पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।श्रद्धालुओं को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। - दिलीप झा 6.पर्यटन स्थल के रूप में विकास से क्षेत्र का समग्र विकास होगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। क्षेत्र की प्रगति को नई दिशा मिलेगी। - गुलाब झा 7.मंदिर परिसर और संपर्क मार्गों में सुरक्षा की कमी महसूस की जाती है।बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ अधिक रहती है।उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए।इससे सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी।श्रद्धालु स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे। - कृष्ण कुमार खां 8.बाहर से आने वाली महिला श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी होती है। मंदिर परिसर के समीप शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।यह एक गंभीर समस्या है।महिला श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।शौचालय की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। - कुमोद झा 9.आश्विन माह के नवरात्र में यहा विशेष पूजा-अर्चना होती है।इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।फिर भी सरकारी सुविधाएं नदारद रहती हैं।इस पर प्रशासन का ध्यान आवश्यक है। - नारायण झा 10.स्थानीय ग्रामीण वर्षों से मंदिर का रखरखाव कर रहे हैं। साफ-सफाई और पूजा व्यवस्था समाज के सहयोग से चल रही है। यह कार्य सीमित संसाधनों में किया जा रहा है। सरकारी सहयोग के बिना यह कठिन होता जा रहा है।प्रशासनिक प्रयास भी जरूरी हैं। - नरेश झा 11. यह स्थल क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख शक्ति पीठ है। लोगों की गहरी आस्था इससे जुड़ी हुई है। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। पर्यटन स्थल का दर्जा मिलना चाहिए। इससे इसकी गरिमा और बढ़ेगी। - प्राणमोहन मिश्र 12.गोसाई जी द्वारा लगभग दो सौ वर्ष पूर्व होली की परंपरा शुरू की गई। तभी से मंदिर परिसर में सामूहिक होली खेली जाती है। यह परंपरा आज भी जीवित है। ग्रामीण सामाजिक एकता के साथ इसमें भाग लेते हैं। यह सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। - रामचंद्र चौधरी 13. वर्ष 1988 में एक ग्रामीण द्वारा निजी स्तर पर मंदिर का निर्माण कराया गया। लाखों रुपये की लागत से आकर्षक मंदिर बनाया गया। परिसर में आदि काली की प्रतिमा स्थापित की गई।तभी से काली पूजा की परंपरा शुरू हुई।यह जनसहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। - सत्येन्द्र झा 14.शारदीय नवरात्र में दस दिनों तक विशेष पूजा होती है। महाष्टमी के दिन विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर बलि की परंपरा है। सैकड़ों छागड़ और भैंसों की बलि दी जाती है। श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है। - शिवशंकर झा 15. मुगल काल से जुड़ी कई मान्यताए इस स्थल से संबंधित हैं। एक श्रद्धालु की हथकड़ी खुलने की कथा प्रचलित है। ऐसी कई घटनाएं लोगों की आस्था का आधार हैं। लेकिन इनका लिखित संकलन नहीं हुआ है। इससे घटनाएं दंतकथा जैसी बनती जा रही हैं। - सुबोध झा 16. मंदिर को आध्यात्मिक पर्यटन सूची में शामिल किया जाना आवश्यक है। इससे मंदिर के विकास को गति मिलेगी। सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध होगा। श्रद्धालुओं की सुविधाएं बेहतर होंगी। मंदिर की लोकप्रियता में और वृद्धि होगी। - उमाशंकर झा बोले जिम्मेदार क्या कहते हैं जिम्मेवार -- इस वर्ष उग्रतारा महोत्सव 2025 के अवसर पर सहरसा जिले के पर्यटन के उद्देश्य से कॉफी टेबल बुक का विमोचन जिलाधिकारी श्री दीपेश कुमार द्वारा किया गया जिसमें भगवती स्थान बनगाँव को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।भगवती स्थान स्थित ललित मंच बिहार के शास्त्रीय संगीत का सबसे बड़ा मंच रहा है। बनगांव घुमौर होली का मुख्य केन्द्र यही है, पर्यटकीय दृष्टिकोण से अपार संभावनाएं हैं। भगवती स्थान को फ़िल्म शूटिंग लोकेशन में शामिल किया जाएगा और पर्यटन विभाग और कला संस्कृति विभाग को ग्रामीणों के मांग से शीघ्र अवगत करवाकर इस दिशा में प्रयास किया जाएगा - स्नेहा झा, जिला कला संस्कृति एवं पर्यटन पदाधिकारी - प्रस्तुति: विजय झा
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