भारत के दुश्मनों को दौड़ा-दौड़ाकर कर देगा खत्म, DRDO ने तैयार किया ऐसा मिसाइल,जान लें ये कितना ताकतवर?
Hindi Gallery Hindi Drdo Flight Tests Man Portable Anti Tank Guided Missile With Top Attack Capability Key Details 8265215 भारत के दुश्मनों को दौड़ा-दौड़ाकर कर देगा खत्म, DRDO ने तैयार किया ऐसा मिसाइल,जान लें ये कितना ताकतवर?
DRDO Man Portable Anti-Tank Guided Missile: MPATGM ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ टेक्नोलॉजी है. ये मौजूदा सेकेंड जेनरेशन की MILAN और Konkurs मिसाइलों से कहीं ज्यादा एडवांस है. DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में इस मिसाइल की टेस्टिंग की.
Last updated on - January 12, 2026 4:04 PM IST
By Anjali Karmakar
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DRDO ने की MPATGM मिसाइल की टेस्टिंग
भारत ने डिफेंस सेक्टर में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) ने एक ऐसी मिसाइल की सफल टेस्टिंग की है, जो दिन हो या रात अपने दुश्मन को दौड़ा-दौड़ाकर खत्म कर सकता है. मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) को कंधे पर रखकर चलाया जा सकता है. यह खास तौर पर टैंकों के ऊपरी हिस्से को भेदने के लिए डिजाइन की गई है, जो अक्सर सबसे कमजोर होता है.
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MPATGM क्या है?
MPATGM ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ टेक्नोलॉजी है. ये मौजूदा सेकेंड जेनरेशन की MILAN और Konkurs मिसाइलों से कहीं ज्यादा एडवांस है. पुरानी वायर-गाइडेड मिसाइलों में सैनिक को टारगेट पर नजर रखनी पड़ती थी, लेकिन नई मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद ही लक्ष्य को ट्रैक कर नष्ट कर देती है. इससे सैनिक तुरंत सुरक्षित स्थान पर जा सकता है, जो आधुनिक युद्ध में जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है.
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किसने मिसाइल को किया डेवलप?
इस मिसाइल की सभी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को DRDO की दूसरी लैब में डेवलप किया गया है. वहीं, हैदराबाद की रिसर्च सेंटर इमेरेट (RCI), चंडीगढ़ की टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), पुणे की हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) और देहरादून की इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE) ने भी इस मिसाइल पर काम किया है.
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कहां से हुई मिसाइल की टेस्टिंग?
DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर में इस मिसाइल की टेस्टिंग की. केके रेंज में एक मूविंग टारगेट पर थर्ड जेनरेशन की मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल की सफल टेस्टिंग हुई.
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क्या है इस मिसाइल की खासियत?
इस मिसाइल का कुल वजन 30 किलोग्राम है. इसका कमांड लॉन्च यूनिट (ट्राईपॉड समेत) 14.25 किलोग्राम है. दो सैनिकों की टीम इसे चला सकती है. इसकी रेंज 200 मीटर से 4000 मीटर तक है, जो रेगिस्तान, पहाड़ और शहरी इलाकों सभी में प्रभावी है. टैंडेम हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वॉरहेड एडवांस टैंकों की कंपोजिट और एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को हराने में सक्षम है. इस मिसाइल का पहला चार्ज ERA को डिएक्टिवेट करता है. दूसरा चार्ज 650 मिलीमीटर से ज्यादा रोल्ड होमोजीनियस आर्मर को हिट कर देता है.
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मॉर्डन टेक्नेलॉजी से लैस
ये मिसाइल कई मॉर्डन टेक्नेलॉजी से लैस है. इसमें खास तरह का इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर लगा है. ये आसानी से अपने टारगेट को आइडेंटिफाई कर लेता है.खराब मौसम में भी सटीक निशाना लगा सकता है. इस मिसाइल के 2 अटैक मोड हैं: डायरेक्ट अटैक. यानी साइड या रियर से सीधा हमला. दूसरा टॉप अटैक. यानी ऊपर चढ़कर टैंक के सबसे कमजोर हिस्से (टरेट/इंजन डेक) को टारगेट करना. 90% से ज्यादा स्वदेशी कंपोनेंट्स के साथ यह अमेरिकी Javelin और इजरायली Spike-LR के बराबर का है.
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फायर कंट्रोल सिस्टम
इस मिसाइल में एक फायर कंट्रोल सिस्टम भी है, जो मिसाइल को लॉन्च करने से पहले लक्ष्य को लॉक करने में मदद करता है. इसका टैंडम वारहेड दुश्मन के कवच को भेदने में माहिर है. इसमें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम भी है, जो मिसाइल के डायरेक्शन और स्पीड को कंट्रोल करता है.
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प्रोपल्शन सिस्टम उड़ान भरने में करता है मदद
प्रोपल्शन सिस्टम इस मिसाइल को उड़ान भरने के लिए पावर देता है. इसमें एक हाई-परफॉरमेंस साइटिंग सिस्टम भी इसमें शामिल है, जो सैनिकों को लक्ष्य को आसानी से पहचानने और निशाना लगाने में मदद करता है.
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मिसाइल को बनाने में कितनी आई लागत?
रक्षा मंत्रालय ने 2015 में 73.46 करोड़ के बजट से MPATGM प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. नाग मिसाइल परिवार की इस मैन-पोर्टेबल वर्जन को पैदल सैनिकों, पैरा-स्पेशल फोर्सेज और एयरबोर्न यूनिट्स के लिए डिजाइन किया गया है.