Ed:घर खरीदारों के साथ ठगी, 19 साल में नहीं मिला फ्लैट; बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से वसूले 1075 करोड़ - Homebuyers Cheated Did Not Receive Flat Even After 19 Years Companies Collected ₹1075 Crore As Advance Booking
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हजारों लोगों ने यह सोच कर हाउसिंग कंपनियों में निवेश कर दिया कि उन्हें समय पर घर/फ्लैट मिल जाएगा। कंपनियों ने अग्रिम बुकिंग के तौर पर 4771 ग्राहकों से 1075 करोड़ रुपये वसूल लिए। ग्राहकों से कहा गया कि उन्हें तय समय पर मकान मिल जाएगा। उन्हें मालूम नहीं था कि फ्लैट मिलने में इतनी देरी हो जाएगी। घर खरीदारों के साथ धोखा किया गया। कई ग्राहकों को 12 से 19 साल की देरी के बाद भी फ्लैट नहीं मिल सका। ईडी ने इस केस में कार्रवाई करते हुए लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
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इन संपत्तियों में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, बहादुरगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद में स्थित लगभग 340 एकड़ के विभिन्न भूखंड और जमीन के बड़े टुकड़े शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने 9 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत यह अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया है। इसमें मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स एरा लैंडमार्क्स लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी) और इसके प्रमोटर हेम सिंह भराना और सुमित भराना से जुड़े धन शोधन मामले में लगभग 585.46 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के मुताबिक, फिलहाल ये संपत्तियां मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड और इसकी संबद्ध/सहायक कंपनियों के स्वामित्व में हैं।
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ईडी ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई चौहत्तर (74) एफआईआर/आरोपपत्रों के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड, उसके प्रमोटरों और सहयोगी कंपनियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर वादे के अनुसार फ्लैट और यूनिट उपलब्ध न कराकर कई घर खरीदारों को धोखा दिया गया। उनके साथ ठगी की गई। डेढ़ से दो दशक बाद भी फ्लैट नहीं मिल सका। ईडी की जांच में पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में कई आवासीय समूह आवास परियोजनाएं शुरू की थीं। आठ परियोजनाओं - कॉस्मोकोर्ट, कॉस्मोसिटी-I, कॉस्मोसिटी-III, स्काईविले, रेडवुड रेजिडेंसी, एरा ग्रीन वर्ल्ड, एरा डिवाइन कोर्ट और एडीईएल डिवाइन कोर्ट - के लिए 4,771 ग्राहकों से लगभग 1,075 करोड़ रुपये अग्रिम बुकिंग राशि के रूप में एकत्र किए थे।
ये परियोजनाएं, जो 2006-2012 में शुरू की गई थीं, आज तक अधूरी हैं। जांच में यह भी पता चला कि प्रमोटरों/निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी धनराशि को वादा किए गए आवास परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय समूह की कंपनियों को भूमि पार्सल खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में दे दिया। धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इसके चलते अभी तक फ्लैट और प्लॉट वितरित नहीं किए गए हैं।
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ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि सामान की डिलीवरी न होने पर मुआवज़ा मांगने वाले ग्राहकों को कंपनी द्वारा चेक जारी किए गए थे, जिनमें से कई चेक विभिन्न कारणों से बाधित हो गए। यह भी पता चला है कि मेसर्स एडीईएल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने परियोजना योजनाओं और लाइसेंस प्राप्त भूमि क्षेत्रों में एकतरफा बदलाव किए, जिसमें मूल रूप से प्रस्तावित भूमि में कमी करना भी शामिल है। इस वजह से खरीदारों को शुरू में किए गए बुनियादी सुविधाओं के वादे पूरे नहीं किए गए। इसके अलावा, समूह के प्रमोटरों ने खरीदारों को सूचित किए बिना परियोजना की भूमि को बैंकों के पास गिरवी रखकर परियोजना विकास के लिए सावधि ऋण लिया था।
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