Ev Bus:महाराष्ट्र ने दिल्ली को पछाड़ा; इलेक्ट्रिक बस बिक्री में नंबर 1 बना, 2025 में हुई रिकॉर्ड बिक्री - Maharashtra Overtakes Delhi To Become India’s Largest Electric Bus Market In 2025

Ev Bus:महाराष्ट्र ने दिल्ली को पछाड़ा; इलेक्ट्रिक बस बिक्री में नंबर 1 बना, 2025 में हुई रिकॉर्ड बिक्री - Maharashtra Overtakes Delhi To Become India’s Largest Electric Bus Market In 2025

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इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की दौड़ में महाराष्ट्र ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) की बिक्री में 60% से ज्यादा की वृद्धि के साथ, महाराष्ट्र ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है और भारत का सबसे बड़ा ई-बस बाजार बन गया है। केंद्र सरकार के 'वाहन' पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में महाराष्ट्र में 1,442 ई-बसें बेची गईं, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 1,382 यूनिट रहा।

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भारत में बढ़ता प्रदूषण-मुक्त परिवहन

देश भर में प्रदूषण-मुक्त सार्वजनिक परिवहन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
कुल बिक्री: पूरे भारत में ई-बसों की बिक्री 2024 के 3,600 यूनिट्स से बढ़कर 2025 में लगभग 4,400 यूनिट्स हो गई है।
वर्ष 2024: 2024 में दिल्ली 1,036 यूनिट्स के साथ सबसे आगे था, जबकि महाराष्ट्र 880 यूनिट्स के साथ दूसरे नंबर पर था।

अन्य राज्यों का हाल

तमिलनाडु: यहां ई-बसों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया। बिक्री 2024 में मात्र 5 यूनिट से बढ़कर 2025 में लगभग 400 यूनिट हो गई।

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कर्नाटक और गुजरात: इन राज्यों में गिरावट दर्ज की गई। कर्नाटक में बिक्री 800 से घटकर 445 रह गई, और गुजरात में 329 से गिरकर 116 यूनिट्स पर आ गई।

सरकारी नीतियों का बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ई-बस बिक्री में यह तेजी मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं जैसे पीएम ई-ड्राइव और पीएलआई-ऑटो के कारण आई है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के प्रबंध निदेशक, अमित भट्ट ने कहा, "ई-बस बिक्री में वृद्धि भारत सरकार की नीतियों और FAME जैसी योजनाओं का परिणाम है। इन योजनाओं ने बसों की शुरुआती लागत को कम किया है, जिससे सार्वजनिक परिवहन संस्थाओं के लिए इन्हें खरीदना आसान हो गया है।" वहीं, ई-बस निर्माता कंपनी EKA मोबिलिटी का कहना है कि अभी भी मांग मुख्य रूप से सरकारी टेंडर्स से आ रही है, जबकि निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) में अभी केवल सीमित पायलट प्रोजेक्ट्स ही चल रहे हैं।

अभी भी लंबी राह तय करनी है

भले ही ई-बसों की संख्या बढ़ रही हो, लेकिन चीन और यूरोपीय संघ की तुलना में भारत अभी काफी पीछे है।
मार्केट शेयर: 2025 में बिकीं कुल बसों में ई-बसों की हिस्सेदारी लगभग 6.5% रही। इसी अवधि में 66,000 से ज्यादा डीजल बसें बेची गईं।
वैश्विक तुलना: नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत में ई-बसों की पैठ 7% थी, जबकि यूरोपीय संघ में यह 14% और चीन में 50% थी।

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को अगर 2070 तक अपने 'नेट-जीरो' उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करना है, तो निजी बस ऑपरेटरों को भी इलेक्ट्रिक बसों को अपनाना होगा। भारत में कुल बस बाजार का केवल 8-9% हिस्सा ही सरकारी एजेंसियों के पास है, बाकी सब निजी हाथों (इंटर-सिटी ट्रेवल, स्कूल बसें, कर्मचारी परिवहन) में है। सरकार वर्तमान में निजी बस ऑपरेटरों के लिए ई-बस फाइनेंसिंग को आसान और सस्ता बनाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि डीजल बसों के प्रभुत्व को कम किया जा सके।

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