Fdi:भारत में नेट एफडीआई घटा, गिरकर एक अरब डॉलर कैसे पहुंचा आंकड़ा? केयरएज की रिपोर्ट में उठे कई गंभीर सवाल - Why Did Net Fdi In India Fall To $1 Billion? Careage Report Raises Questions
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वित्त वर्ष 2020 से 2025 के बीच भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह 70 से 85 अरब डॉलर के दायरे में बना रहा, लेकिन इस अवधि में वृद्धि लगभग ठहरी रही। केयरएज रेटिंग्स के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सकल एफडीआई में सालाना औसत वृद्धि दर (CAGR) करीब 2 प्रतिशत रही। हालांकि, ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसी अवधि में भारत में नेट एफडीआई में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
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एफडीआई प्रवाह में चार वर्षों में आई बड़ी गिरावट
केयरएज के अनुसार, नेट एफडीआई प्रवाह वित्त वर्ष 2020 में 44 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर महज 1 अरब डॉलर रह गया। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भले ही सकल एफडीआई में सुधार दिखा हो, लेकिन विदेशी निवेशकों द्वारा मुनाफे की ज्यादा वापसी और भारत से बाहर एफडीआई प्रवाह बढ़ने के कारण नेट एफडीआई पर भारी दबाव पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 और 2024 में सकल एफडीआई लगभग 71 अरब डॉलर पर स्थिर रहा था, जो वित्त वर्ष 2025 में 13 प्रतिशत बढ़कर 81 अरब डॉलर पहुंच गया। इसके बावजूद, मुनाफे की वापसी और आउटवर्ड एफडीआई में तेज बढ़ोतरी के चलते नेट एफडीआई वित्त वर्ष 2024 में घटकर 10 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025 में सिर्फ 1 अरब डॉलर रह गया।
इनवर्ड एफडीआई पर औसत रिर्टन कितना है?
हालांकि, केयरएज ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में इनवर्ड एफडीआई पर औसत रिटर्न 7.3 प्रतिशत बना हुआ है, जो कई उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार, किसी विदेशी कंपनी का मुनाफा दोबारा निवेश करना या उसे वापस ले जाना उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं और पूंजी आवंटन नीति को दर्शाता है। वहीं, आउटवर्ड एफडीआई में वृद्धि विदेशी बाजारों और संसाधनों तक पहुंच का संकेत मानी जाती है।
सेक्टर के लिहाज से क्या है स्थिति?
वित्त वर्ष 2025 में सर्विस सेक्टर एफडीआई इक्विटी का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता रहा, जिसकी हिस्सेदारी कुल प्रवाह में 19 प्रतिशत रही। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सेक्टर को 16 प्रतिशत एफडीआई मिला। ट्रेडिंग और नॉन-कन्वेंशनल एनर्जी सेक्टर को 8-8 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली। इस दौरान ट्रेडिंग, नॉन-कन्वेंशनल एनर्जी, ऑटोमोबाइल और केमिकल (फर्टिलाइजर को छोड़कर) सेक्टर में एफडीआई बढ़ा, जबकि फार्मास्यूटिकल्स और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में निवेश घटा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी स्टोरेज और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्र विदेशी निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर एफडीआई का क्या है हाल?
वैश्विक स्तर पर एफडीआई परिदृश्य पर नजर डालें तो रिपोर्ट में बताया गया कि हाल के वर्षों में वैश्विक एफडीआई प्रवाह कमजोर रहा है और जीडीपी वृद्धि की तुलना में पिछड़ता गया है। वैश्विक एफडीआई का जीडीपी के मुकाबले अनुपात 2021 में 2.4 प्रतिशत के शिखर से गिरकर 2024 में 1.3 प्रतिशत रह गया है। यह गिरावट 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से जारी है, जब 2007 में यह अनुपात 5.3 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
रिपोर्ट में यूरोप से आउटवर्ड एफडीआई में गिरावट और अमेरिका से प्रवाह में ठहराव की ओर भी इशारा किया गया है। इसके विपरीत, चीन की वैश्विक आउटवर्ड एफडीआई में हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जो शुरुआती 2000 के दशक में निचले स्तर से बढ़कर महामारी के बाद के वर्षों में औसतन करीब 11 प्रतिशत तक पहुंच गई है। चीन+1 रणनीति से लाभान्वित देशों जैसे वियतनाम, मेक्सिको और अफ्रीका के संसाधन-संपन्न देशों में इनबाउंड एफडीआई में तेज वृद्धि देखी गई है। वहीं, भारत की वैश्विक एफडीआई इनफ्लो में हिस्सेदारी 2.9 प्रतिशत से घटकर 2.4 प्रतिशत रह गई है, जिसका मुख्य कारण मुनाफे की बढ़ी हुई वापसी बताया गया है।
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