Fourth Common Cancer In Women,महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर कौन सा है? काफी हद तक रोकना आसान, 2 तरीके आते हैं काम - two ways to prevent womens fourth common cancer in world - Health News
दुनियाभर में महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर एक बड़ा खतरा बना हुआ है। क्योंकि यह इनके अंदर होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। अच्छी बात यह है कि इसे काफी हद तक रोक सकते हैं। अगर यह बीमारी शुरुआत में ही पकड़ ली जाए तो इलाज भी पूरी तरह संभव है। लेकिन जिन क्षेत्रों में संसाधन सीमित हैं, वहां यह एक मृत्यु का बड़ा कारण है। यह यूट्रस का निचले हिस्से में शुरू होता है, जिसे सर्विक्स या गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं। यह एक संकरा हिस्सा होता है, जो गर्भाशय और योनि को जोड़ता है। जब इस सर्विक्स की सेल्स में असामान्य और अनियंत्रित विकास होता है, तो सर्वाइकल कैंसर बनता है।लगभग एक ही कारण है
कैंसर का यह प्रकार लगभग ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के लगातार इंफेक्शन की वजह से होता है। आमतौर पर यही एक कारण होता है। एचवीपी वायरस के कई सारे प्रकार होते हैं, लेकिन टाइप 16 और 18 दुनियाभर के 75 प्रतिशत से अधिक सर्वाइकल कैंसर के केस की वजह होते हैं। एचपीवी के गंभीर इंफेक्शन सेल्स के अंदर असामान्य विकास पैदा कर सकते हैं, इन पर ध्यान ना जाने या इलाज ना मिलने से यह धीरे धीरे कैंसर बन सकता है।
बचने के 2 तरीके
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सर्वाइकल कैंसर को रोकना बहुत आसान है। इसके लिए दो प्रमुख तरीके महत्वपूर्ण होते हैं। सबसे पहले तो आपको एचपीवी की वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए और हमेशा सुरक्षित यौन व्यवहार में रहें। दूसरा रेगुलर स्क्रीनिंग या जांच करवाएं। जिन लोगों को सर्वाइकल कैंसर का अधिक खतरा होता है, वो अपने डॉक्टर से पूछकर एक समय अंतराल का चुनाव कर सकते हैं।
कौन से टेस्ट आएंगे काम?
इस कैंसर को रोकने के लिए ये जांच और स्क्रीनिंग काम आ सकती हैं। एक तो एचपीवी टेस्टिंग, जिसमें शरीर में ज्यादा खतरनाक और कम खतरनाक वाले वायरस के टाइप की पहचान की जाती है। दूसरा पैप स्मीयर, जिसमें सेल्स में होने वाले बदलावों और उनकी गंभीरता को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है, जिनमें आगे चलकर कैंसर बनने का खतरा होता है।
कब और कौन सा टेस्ट करवाना चाहिए?
सर्वाइकल कैंसर की टेस्टिंग और स्क्रीनिंग के लिए नेशनल और इंटरनेशनल गाइडलाइन्स दी गई हैं। ये कहती हैं कि 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को एचपीवी टेस्टिंग रेगुलर करवाने की जरूरत नहीं है। लेकिन पैप स्मीयर स्क्रीनिंग 21 साल की उम्र से शुरू करवा लेनी चाहिए और 65 की उम्र तक जारी रखें। पिछली स्क्रीनिंग की रिपोर्ट देखकर इन टेस्टिंग का इंटरवल 3 से 5 साल के बीच हो सकता है। अगर रिजल्ट में कोई गड़बड़ी नजर आती है तो सटीक जानकारी के लिए आपका डॉक्टर कोल्पोस्कोपी से आगे की जांच कर सकता है।
ये लोग रहें ज्यादा सावधान
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एचपीवी इंफेक्शन और सर्वाइकल कैंसर का खतरा कुछ कारण बढ़ाते हैं। जैसे-
कई यौन साथी यौन गतिविधि की जल्दी शुरुआत यौन संचारित संक्रमणों का इतिहास बच्चों की ज्यादा संख्या एचआईवी संक्रमण जननांग संक्रमणों के अन्य संक्रमण के साथ सह संक्रमण धूम्रपान करने की आदत लंबे समय तक ओरल गर्भनिरोधक का इस्तेमाल
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।