Greenland Doanld Trump Panama Canal North China,आर्कटिक के 'पनामा नहर' पर कब्‍जे के लिए महाशक्तियों में जंग, ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान से क्यों डरे चीन और रूस? - donald trump greenland panama canal north why us try to control northwest passage china russia feal - America News

Greenland Doanld Trump Panama Canal North China,आर्कटिक के 'पनामा नहर' पर कब्‍जे के लिए महाशक्तियों में जंग, ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान से क्यों डरे चीन और रूस? - donald trump greenland panama canal north why us try to control northwest passage china russia feal - America News
वॉशिंगटन:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं। उनका वश चले तो वो आज और इसी वक्त ग्रीनलैंड पर कब्जा करने अमेरिकी सैनिकों को रवाना कर दें। लेकिन ये इतना आसान नहीं है। यूरोप भी ग्रीनलैंड को बचाने हाथ पैर मार रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर इतनी बेताबी क्यों है? ट्रंप के ग्रीनलैंड और आर्कटिक प्लान से आखिर चीन और रूस क्यों डरे हुए हैं? ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की इतनी दिलचस्पी चीन और रूस जैसी महाशक्तियों को क्यों परेशान कर रही हैं, इससे जानना और समझना जरूरी हो जाता है।

दरअसल, आर्कटिक क्षेत्र में सदियों से जमी बर्फ अब तेजी से पिघल रही है और पिघलती बर्फ ने नये समुद्री रास्तों को खोलना शुरू कर दिया है। इससे ना सिर्फ समुद्री व्यापार, बल्कि नये सिरे से सैन्य संतुलन बनाने की भी जरूरत होने लगी है। इन्हीं में से एक अहम समुद्री रास्ता है नॉर्थवेस्ट पैसेज। ये एक ऐसा समुद्री मार्ग है, जो कनाडा के उत्तरी तटों से होते हुए यूरोप को एशिया से जोड़ता है। जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट इसे 'भविष्य का पनामा नहर नॉर्थ' कह रहे हैं। अमेरिका, सालों से चीन के पनामा नहर के दोनों सिरों पर लगातार बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क रहा है और डोनाल्ड ट्रंप तो सार्वजनिक तौर पर इस बात को लेकर भी लड़ चुके हैं, ऐसे में उनकी नई रणनीति, आर्कटिक में भी किसी प्रतिद्वंद्वी ताकत को निर्णायक बढ़त लेने से रोकने की है। जाहिर तौर पर इसका सीधा असर चीन और रूस पर होगा।
Panama Canal
ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की इतनी जिद क्यों है?
ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की जिद बचकाना लगे, लेकिन ये एक जियो-पॉलिटिकल जंग है। इस पूरी भूमिका में दरअसल ग्रीनलैंड की भूमिका काफी अहम हो जाती है। नॉर्थवेस्ट पैसेज के पश्चिमी छोर पर अमेरिका का अलास्का पहले से मौजूद है, जबकि पूर्वी प्रवेश द्वार पर ग्रीनलैंड स्थित है। जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट जेफ महोन के मुताबिक, ग्रीनलैंड इस समुद्री मार्ग का "ईस्टर्न फ्लैंक" है। यूरोप से एशिया की तरफ जाने वाले जहाजों को नॉर्थवेस्ट पैसेज में दाखिल होने से पहले ग्रीनलैंड के आसपास के समुद्री क्षेत्र से गुजरना ही होगा। ऐसे में अगर, अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य, राजनीतिक या रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करता है, तो वह इस पूरे रास्ते के दोनों सिरों को मजबूती से कंट्रोल कर सकता है। ठीक उसी तरह, जैसे अमेरिका ने दशकों से पनामा नहर वैश्विक व्यापार को अपने कंट्रोल में रखा है। चीन, अमेरिका के इस इरादे को बहुत पहले से जान रहा है इसलिए वो दुनियाभर में अपने रणनीतिक ठिकानों की तलाश कर रहा है। चीन पहले ही खुद को 'आर्कटिक क्षेत्र का नजदीकी' देश घोषित कर चुका है और वो रूस के साथ मिलकर नॉर्थईस्ट पैसेज, जो रूस के उत्तरी तट के साथ-साथ मिलता है, उसमें अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन भविष्य में कनाडा से गुजरने वाले नॉर्थवेस्ट पैसेज में भी समानांतर विकल्प तैयार करना चाहता है। अटलांटिक काउंसिल की सीनियर फेलो जस्टिना बुडगिनाइट-फ्रोएहली ने निक्केई एशिया में लिखा है कि जैसे-जैसे आर्कटिक शिपिंग के लिए अधिक सुलभ होता जाएगा, चीन वहां मौजूद रहकर नियमों, ढांचे और शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करेगा। आर्कटिक आज भी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बहुत कुछ अभी तय होना बाकी है और यही अनिश्चितता बड़ी शक्तियों को वहां खींच रही है। ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान के पीछे भी यही रणनीति है।

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