Hamas New Chief:युद्ध, तबाही और दबाव के बीच हमास चुन सकता है नया प्रमुख, खालिद मशाल और अल-हय्या दौड़ में - Hamas Is Expected To Elect A New Leader This Month Khalil Al-hayya And Khaled Meshaal
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दो साल से ज्यादा चले इस्राइल-हमास संघर्ष के बाद फलस्तीन की स्थिति अत्यंत दयनीय है। अलग बात है कि कई देशों के प्रयास के बाद अब गाजा में पुनर्निमाण की योजना भी बनाई जा रही है। बहरहाल फलस्तीन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खबर यह है कि फलस्तीनी इस्लामी संगठन हमास इस महीने अपना नया प्रमुख चुन सकता है। संगठन के दो सूत्रों ने नए प्रमुख के चुनाव की जानकारी दी है। याह्या सिनवार की मौत के बाद से शीर्ष नेतृत्व का पद खाली है। बता दें कि हमास के नए प्रमुख के दौर में खलील अल-हय्या और खालिद मशाल शीर्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
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खलील अल-हय्या और खालिद मशाल फिलहाल कतर में रहते हैं और उस पांच सदस्यीय नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं, जो सिनवार की मौत के बाद से संगठन का संचालन कर रही है। हमास पिछले दो वर्षों से गाजा युद्ध के कारण भारी दबाव में है। यह युद्ध 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था।
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कैसे होता है हमास में नेता का चुनाव?
इस्राइल के साथ चले संघर्ष के बाद संगठन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियार छोड़ने की मांगों का भी सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नया नेता हमास की 50 सदस्यीय शूरा परिषद द्वारा गुप्त मतदान से चुना जाएगा। इस परिषद में गाजा पट्टी, पश्चिमी तट और विदेश में रह रहे हमास के सदस्य शामिल हैं। दूसरी तरफ, हमास के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है।
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उप-नेता का भी होगा चुनाव
इतना ही नहीं हमास एक नया उप-प्रमुख भी चुनेगा। यह पद सालेह अल-अरूरी की मौत के बाद खाली है, जिनकी 2024 में लेबनान में इस्राइली हमले में मौत हो गई थी। ऐसे में कुछ नेताओं का मानना है कि संगठन को किसी एक व्यक्ति की बजाय सामूहिक नेतृत्व से चलाना बेहतर होगा, ताकि इज़राइल के हमलों का खतरा कम हो।
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मशाल बनाम हय्या- क्या फर्क है?
खालिद मशाल को हमास का अपेक्षाकृत व्यावहारिक चेहरा माना जाता है। उनके संबंध कई सुन्नी मुस्लिम देशों से अच्छे हैं। खलील अल-हय्या हमास के मुख्य वार्ताकार हैं और उनके ईरान से रिश्ते मजबूत माने जाते हैं। गौरतलब है कि यह समय 1987 में बने हमास के लिए अब तक का सबसे कठिन समय माना जा रहा है। हालांकि अक्तूबर में अमेरिका की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ है, लेकिन इस्राइल अब भी गाजा के लगभग आधे हिस्से पर कब्जा किए हुए है। हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और गाजा में रहने वाले 20 लाख लोग बेहद खराब हालात में जी रहे हैं।
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