Haripurdhar Bus Accident:पंद्रह दिन में होगी बस हादसे की जांच, प्रदेश में सड़कों पर 373 ब्लैक स्पॉट जानलेवा - Haripurdhar Bus Accident Investigation Will Be Held In 15 Days 373 Black Spots On Roads In The State Fatal
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हरिपुरधार में शुक्रवार को हुए निजी बस हादसे के कारणों की जांच को लेकर उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने टीम गठित कर दी है। एसडीएम संगड़ाह की अध्यक्षता में टीम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। 15 दिन के भीतर टीम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद मामले में आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उधर, शनिवार को हादसे में के दौरान बस में सवार लोगों की संख्या स्पष्ट हुई है।
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शुक्रवार देर रात तक रिपोर्ट में सामने आ रहा था कि बस में हादसे के दौरान करीब 66 लोग सवार थे, लेकिन अस्पतालों आदि से शनिवार को प्रशासन को मिली पुख्ता जानकारी के बाद सवारों की संख्या बढ़ी है। हादसे के समय बस में कुल 75 लोग सवार थे। ऐसे में 9 और लोग घायलों में शामिल हुए हैं। हादसे में घायल बस परिचालक का इलाज मेडिकल कालेज एवं अस्पताल नाहन में चल रहा है।
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उधर, उपायुक्त प्रियंका वर्मा व एसपी एनएस नेगी ने शनिवार को घटनास्थल का दौरा किया।उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने बताया कि एसडीएम की अध्यक्षता में जांच टीम गठित कर दी गई है। 15 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
सड़कों पर 373 ब्लैक स्पॉट जानलेवा
हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर सफर लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। खराब सड़क स्थिति, तीखे मोड़ और लापरवाही के चलते ब्लैक स्पॉट जानलेवा साबित हो रहे हैं। सिरमौर के हरिपुरधार में ओवरलोड निजी बस के हादसे ने एक बार फिर सड़क व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। वर्ष 2018 से पहले प्रदेश में चिन्हित किए गए सभी 147 ब्लैक स्पॉट्स को समय रहते दुरुस्त कर लिया गया था, हालांकि इसके बाद वर्ष 2018 से 2024 के बीच राज्य में सड़क हादसों के लिहाज से 521 नए ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए। इनमें से अब तक केवल 148 ब्लैक स्पॉट्स का ही सुधार हो पाया है, जबकि 373 ब्लैक स्पॉट्स अभी भी दुर्घटनाओं का खतरा बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार लोक निर्माण विभाग ने 26 ब्लैक स्पॉट्स को ठीक किया है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 85 और परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 37 ब्लैक स्पॉट्स का सुधार किया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम का कहना है कि सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ब्लैक स्पॉट की पहचान निरंतर प्रक्रिया है और सभी संबंधित विभाग मिलकर इन्हें सुरक्षित बनाने के लिए संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।