कांग्रेस में गुटबाजी की जड़ गहरी:वरिष्ठ नेताओं के बीच खींचतान बनी हाईकमान के लिए चुनौती; गुटीय समीकरण हावी - Haryana Politics Factionalism Runs Deep In Haryana Congress News In Hindi

कांग्रेस में गुटबाजी की जड़ गहरी:वरिष्ठ नेताओं के बीच खींचतान बनी हाईकमान के लिए चुनौती; गुटीय समीकरण हावी - Haryana Politics Factionalism Runs Deep In Haryana Congress News In Hindi

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हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी अब केवल अंदरूनी मतभेद नहीं बल्कि संगठन की कार्यशैली को प्रभावित करने वाली स्थायी सच्चाई बन चुकी है। पार्टी नेतृत्व एक तरफ संगठन को मजबूत करने और अनुशासन का संदेश देने में जुटा है, दूसरी तरफ प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक एजेंडे इस कोशिश को कमजोर कर रहे हैं।  और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

कांग्रेस हाईकमान हरियाणा में संगठन से गुटबाजी दूर करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है। वर्तमान में जिलाध्यक्षों को एकजुटता का पाठ पढ़ाया जा रहा है लेकिन गुटबाजी का रोग तब तक दूर नहीं होगा जब तक प्रदेश के शीर्ष स्तर के नेताओं में एकजुटता नहीं आती। विज्ञापन विज्ञापन

प्रदेश कांग्रेस में सबसे प्रभावशाली धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट का माना जाता है। उनकी पकड़ संगठन, विधायक दल और चुनावी रणनीति में स्पष्ट दिखती है। इसके समानांतर सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा का गुट है जो खासतौर पर दलित समाज और कुछ क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए हुए है। 

तीसरा बड़ा खेमा राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला के इर्द-गिर्द माना जाता है। जिनकी राष्ट्रीय सक्रियता के बावजूद प्रदेश की राजनीति में अलग दखल बना हुआ है। इन तीनों गुटों के बीच तालमेल की कमी लंबे समय से कांग्रेस की कमजोरी बनी हुई है।

 

इनके अलावा कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जो औपचारिक रूप से किसी गुट का हिस्सा न दिखते हुए भी अपनी अलग राजनीति चला रहे हैं। पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव दक्षिण हरियाणा में अपनी स्वतंत्र पकड़ बनाए हुए हैं और संगठनात्मक फैसलों में अपने क्षेत्रीय प्रभाव को प्राथमिकता देते रहे हैं। 

कांग्रेस के भीतर एक और असंतुलन...

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की राजनीति भी अलग राह पर चलती दिखाई देती है। उनका सामाजिक आधार और राजनीतिक दृष्टिकोण अक्सर प्रदेश नेतृत्व की मुख्यधारा से अलग नजर आता है। इससे कांग्रेस के भीतर एक और असंतुलन पैदा होता है।

 

लोकसभा चुनाव के बाद संगठन विस्तार के समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा था कि गुटबाजी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्देश थे कि पद और व्यक्ति से ऊपर पार्टीहित को रखा जाए। 

अब कुरुक्षेत्र में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

इसी क्रम में अब कुरुक्षेत्र में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से जिलाध्यक्षों को गुटबाजी से दूर रहकर कांग्रेस को मजबूत करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इस शिविर में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का संवाद भी प्रस्तावित है।

 

गुटीय समीकरण हावी

जमीनी हकीकत यह है कि कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से लेकर कार्यक्रमों की जिम्मेदारी तक गुटीय समीकरण हावी हैं। कई जिलों में कार्यकर्ता खुलकर कहते हैं कि संगठन के फैसले पार्टी से ज्यादा नेताओं की पसंद-नापसंद से तय होते हैं। यही स्थिति एकजुटता के संदेश को खोखला बनाती है।

बड़े नेताओं को एकसाथ लाना चुनौती

हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हुड्डा, सैलजा, सुरजेवाला के गुटों के साथ-साथ कैप्टन अजय यादव और बीरेंद्र सिंह जैसे नेताओं की अलग राजनीतिक धाराओं को एक साझा दिशा में लाया जाए। जब तक वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर गुटबाजी पर ठोस और समान कार्रवाई नहीं होती, तब तक जिलाध्यक्षों को पढ़ाया जा रहा एकजुटता का पाठ जमीनी सच्चाई से टकराता ही रहेगा। लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी के दौरे के समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा एक मंच पर आई थीं। उसके बाद से दोनों नेताओं को पार्टी नेतृत्व एकसाथ नहीं ला पाया है।

भविष्य में नजर नहीं आएगी गुटबाजी

कांग्रेस में गुटबाजी करने वालों को सख्त चेतावनी देने के साथ-साथ अनुशासनात्मक कमेटी का गठन भी किया गया है। संगठन विस्तार के बाद गुटबाजी के कारण अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। कई बार कुछ गतिविधियों को पार्टी के बाहर के लोग गुटबाजी के नजरिए से देखने लगते हैं जबकि ऐसा नहीं होता है। वरिष्ठ नेताओं के साथ जमीनी स्तर पर भी गुटबाजी से नुकसान का पाठ पढ़ाया जा चुका है। भविष्य में गुटबाजी जैसी स्थिति नजर नहीं आएगी।-बीके हरिप्रसाद, प्रभारी, हरियाणा कांग्रेस
 

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