Has Your Child Discovered Your Weakness Try This One Expert Trick,क्या बच्चा आपकी कमजोरी को हथियार बना रहा है? एक्सपर्ट की बताई ये 1 ट्रिक अपनाएं, कभी आप पर हावी नहीं हो पाएगा - has your child discovered your weakness try this one expert trick and they ll never dominate you - Family News
टीनएजर उम्र में पेरेंट्स और बच्चों के रिश्ते में वैसे ही तनाव बढ़ जाता है। अगर इस दौरान बच्चा माता-पिता की किसी कमजोरी को पहचान लेता है, तो समस्या और गहरी हो सकती है। क्योंकि बच्चे कभी-कभी इन कमजोरियों को अपनी ताकत बना लेते हैं और कई मामलों में पेरेंट्स पर हावी होने की कोशिश भी करते हैं। ऐसे समय में माता-पिता को क्या करना चाहिए, इस बारे में पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है। आइए जानते हैं।
(सभी तस्वीरें-सांकेतिक हैं)
11 से 13 साल की उम्र में बच्चे पेरेंट्स की कमोजरी को पहचान लेते हैं
पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा बताती हैं कि 11 से 14 साल की उम्र में बच्चे धीरे-धीरे अपने माता-पिता को समझने लगते हैं। इस दौरान वे पेरेंट्स की खूबियों के साथ-साथ उनकी कमज़ोरियों को भी पहचान लेते हैं-जैसे मां की पढ़ाई बहुत अच्छी नहीं रही या पिता गुस्से के समय कुछ बोल ही नहीं पाते हैं।
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बच्चा कमजोरियों को कंट्रोल-स्विच की तरह यूज करते हैं
बच्चा यह समझने लगता है कि अगर वह किसी खास बात को छेड़ दे, तो मां चुप हो जाएंगी, या अगर वह गुस्सा दिखाए, तो पिता कुछ नहीं कहेंगे। धीरे-धीरे बच्चा पेरेंट्स की इन कमजोरियों को कंट्रोल-स्विच की तरह इस्तेमाल करने लगता है। नतीजतन, माता-पिता के प्रति सम्मान धीरे-धीरे कम होने लगता है।
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बच्चे जान जाते हैं कि मां उनसे डरती है
बच्चे यह भी समझने लगते हैं कि मां दूसरों के सामने उससे डरती हैं या फिर पापा को मोबाइल और फोन से जुड़ी कई चीजें तो समझ ही नहीं आतीं। धीरे-धीरे बच्चा इन व्यवहारों का पैटर्न पहचान लेता है और यहीं से उसके भीतर पेरेंट्स पर इमोशनल डॉमिनेंस बनना शुरू हो जाता है।
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बच्चा पेरेंट्स की कम करना शुरू कर देता है
बच्चे यह भी समझने लगते हैं कि मां दूसरों के सामने उससे डरती हैं या फिर पापा को मोबाइल और फोन से जुड़ी कई चीजें तो समझ ही नहीं आतीं। धीरे-धीरे बच्चा इन व्यवहारों का पैटर्न पहचान लेता है और यहीं से उसके भीतर पेरेंट्स पर इमोशनल डॉमिनेंस बनना शुरू हो जाता है।
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आत्मविश्वास के साथ रखें अपनी बात
एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को अपनी कमजोरियों को गिल्ट नहीं, बल्कि विजडम में बदलना चाहिए। बच्चों से साफ कहें कि हां, मैंने उतनी ही पढ़ाई की है और इसी वजह से चाहता/चाहती हूं कि तुम मुझसे बेहतर पढ़ाई करो। अपनी बात पूरे आत्मविश्वास के साथ रखें, न कि जस्टिफिकेशन के तौर पर।
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