Health Tips:क्या बच्चों को प्रोटीन सप्लीमेंट देना फायदेमंद होता है? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर - Health Tips: Protein Shakes To Children Doctor Explain Child Growth Nutrition Diet
{"_id":"69664dea5c427b983e078295","slug":"health-tips-protein-shakes-to-children-doctor-explain-child-growth-nutrition-diet-2026-01-13","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Health Tips: क्या बच्चों को प्रोटीन सप्लीमेंट देना फायदेमंद होता है? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}} Health Tips: क्या बच्चों को प्रोटीन सप्लीमेंट देना फायदेमंद होता है? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 13 Jan 2026 07:22 PM IST सार
Protein Intake Children: अक्सर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि क्या बच्चों को प्रोटीन पाउडर को सेफ है? इसी विषय पर डॉक्टर ने कुछ जरूरी बातें बताईं हैं, जिसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए? आइए विस्तार से जानते हैं।
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क्या प्रोटीन पाउडर बच्चों को देना सुरक्षित है?
- फोटो : Amar Ujala
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Doctor Advice For Kids Protein Supplement: आजकल के दौर में बच्चों की डाइट को लेकर माता-पिता काफी सजग रहते हैं। बाजार में मौजूद विज्ञापनों को देखकर अक्सर पेरेंट्स के मन में यह सवाल उठता है कि क्या उनके बढ़ते बच्चे के लिए 'प्रोटीन शेक' जरूरी है? प्रसिद्ध डॉक्टर मल्हार गणला ने इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि सामान्य स्थिति में बच्चों को अतिरिक्त प्रोटीन सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं होती है।
बच्चों का शरीर प्राकृतिक भोजन से ही अपनी जरूरतें पूरी कर लेता है। हालांकि आधुनिक जीवनशैली और कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में प्रोटीन शेक एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे बिना सोचे-समझे देना फायदे के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।
माता-पिता को यह समझना चाहिए कि प्रोटीन सप्लीमेंट कोई जादुई टॉनिक नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट पोषक तत्व है जिसे केवल डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह पर ही शुरू करना चाहिए। आइए जानते हैं वे कौन सी तीन विशेष स्थितियां हैं, जिनमें बच्चों को प्रोटीन शेक देना जरूरी हो जाता है।
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क्या प्रोटीन पाउडर बच्चों को देना सुरक्षित है?
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क्या है डॉक्टर की विशेष सलाह?
डॉक्टर मल्हार गणला के अनुसार, बच्चों को केवल इन तीन परिस्थितियों में ही प्रोटीन शेक दिया जाना चाहिए-
विशेष बच्चे : जिन बच्चों का आईक्यू लेवल कम होता है या जो भूख का सही संकेत नहीं दे पाते, उनके वजन को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह पर 20-30 ग्राम प्रोटीन दिया जा सकता है।
एथलेटिक बच्चे: यदि बच्चा किसी खेल में पेशेवर प्रशिक्षण ले रहा है और प्रतिदिन 3-4 घंटे से अधिक कड़ी मेहनत करता है।
अत्यधिक मोटापा: यदि बच्चे का बीएमआई (BMI) 35-40 से ऊपर चला गया है, तो अल्पकालिक वजन घटाने की प्रक्रिया के तहत प्रोटीन दिया जा सकता है।
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क्या प्रोटीन पाउडर बच्चों को देना सुरक्षित है?
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बच्चों को प्रोटीन देने के पीछे क्या है मुख्य कारण?
सप्लीमेंट की जरूरत तब पड़ती है जब शरीर की मांग और भोजन की आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर हो-
मोटापे की स्थिति में प्रोटीन भूख को नियंत्रित करने और मांसपेशियों को बचाने में मदद करता है। पेशेवर स्पोर्ट्स में 3-4 घंटे की ट्रेनिंग के बाद मांसपेशियों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता होती है। विशेष बच्चों में अधिक कार्बोहाइड्रेट खाने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए प्रोटीन एक संतुलित विकल्प बनता है।
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प्रोटीन पाउडर
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बिना डॉक्टर की सलाह के प्रोटीन देने का क्या असर होगा?
सावधानी न बरतने पर भविष्य में बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है-
छोटी उम्र में अनावश्यक प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से बच्चों की किडनी पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। बिना व्यायाम के प्रोटीन शेक पीने से कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। किसी भी प्रोटीन सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना अनिवार्य है ताकि बच्चे की आयु और वजन के अनुसार सही मात्रा तय की जा सके।
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प्रोटीन
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प्राकृतिक आहार ही है बच्चों के लिए सर्वोत्तम
डॉक्टर मल्हार गणला का संदेश बहुत स्पष्ट है कि अगर आपका बच्चा सामान्य रूप से खेलता-कूदता है और संतुलित भोजन करता है, तो उसे बाजार के प्रोटीन पाउडर की कोई जरूरत नहीं है। सामान्य साइकिलिंग या पार्क में खेलने के लिए सप्लीमेंट देना सेहत से खिलवाड़ हो सकता है। बच्चों के विकास के लिए दूध, अंडे, दालें और पनीर जैसे प्राकृतिक स्रोत ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी माध्यम हैं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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