High Court :लिव-इन में रहकर बने संबंध टूटने पर दर्ज हुआ केस, हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास समेत पूरी सजा रद्द की - Case Filed Breakdown Live-in Relationship, High Court Cancels Entire Sentence Including Life Imprisonment

High Court :लिव-इन में रहकर बने संबंध टूटने पर दर्ज हुआ केस, हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास समेत पूरी सजा रद्द की - Case Filed Breakdown Live-in Relationship, High Court Cancels Entire Sentence Including Life Imprisonment

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म समेत गंभीर मामलों में दी गई आजीवन कारावास समेत सभी सजाएं रद्द कर दीं। कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से स्पष्ट है कि युवती बालिग थी और अपनी इच्छा से अभियुक्त के साथ रह रही थी। ऐसे में निचली अदालत की ओर से दिया गया दोषसिद्धि का आदेश कानून सही नहीं है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा-प्रथम की खंडपीठ ने आरोपी चंद्रेश की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। अपील महाराजगंज के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) के छह मार्च 2024 को दिए गए निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि युवाओं में बिना विवाह साथ रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे संबंध विफल होने पर आपराधिक मामले दर्ज कराए जा रहे हैं। विज्ञापन विज्ञापन

अभियोजन के अनुसार फरवरी 2021 में अभियुक्त ने शिकायतकर्ता की बेटी को शादी का झांसा देकर अपने साथ बंगलूरू ले गया और वहां शारीरिक संबंध बनाए। बाद में युवती के लौटने पर मामला दर्ज कराया गया। निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उम्र के संबंध में कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका अभियोजन

बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता की उम्र के संबंध में अभियोजन ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। विद्यालय के अभिलेखों के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं था, जबकि अस्थि परीक्षण रिपोर्ट और सीएमओ की ओर से जारी प्रमाण पत्र के अनुसार युवती की उम्र लगभग 20 वर्ष पाई गई। एफआईआर में भी उसकी उम्र 18 वर्ष छह माह दर्ज थी, जिसे बाद में बदलकर 17 वर्ष बताया गया।

अधिवक्ता ने पीड़िता के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने स्वयं स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई, सार्वजनिक बस और ट्रेन से यात्रा की और किसी भी चरण पर मदद के लिए आवाज नहीं दी। वह बंगलूरू में छह माह तक आरोपी के साथ रही और सहमति से शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी द्वारा शिकारपुर चौराहे पर छोड़े जाने के बाद ही उसने अपने परिवार से संपर्क किया।

कोर्ट ने कहा कि अपहरण और जबरन विवाह से संबंधित धाराओं में दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। बालिग होने की स्थिति में पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धारा भी लागू नहीं होती। एससी/एसटी एक्ट को भी अदालत ने स्वतंत्र अपराध न मानते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही सजा भी रद्द कर दी गई की गई कि कथित कृत्य आरोपी पर आरोपित नहीं था।

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