High Court :हाईकोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण में वृद्धि को सही ठहराया, पुनरीक्षण अर्जी खारिज - High Court Upheld The Increase In The Maintenance Of The Wife, Dismissed The Revision Petition
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पति स्वस्थ है। अगर वह मजदूरी भी करे तो 600 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 18 हजार रुपये महीना कमा सकता है। ऐसे में तीन हजार रुपये पत्नी को गुजारा-भत्ता दिया जाना अधिक नहीं है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की एकल पीठ ने पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी।
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शाहजहांपुर निवासी सुरेश चंद्र ने पत्नी को गुजारा-भत्ता पांच सौ से बढ़ाकर तीन हजार रुपये करने के परिवार न्यायालय के 26 जुलाई 2024 के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण अर्जी दायर की थी। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची मजदूर है और वह कठिनाई से जीवनयापन करता है। बढ़ाया गया गुजारा भत्ता अत्यधिक और अनुचित है। ट्रायल कोर्ट ने फैसला देते हुए तथ्यों पर विचार नहीं किया। इस पर राज्य के वकील ने दलील दी कि वर्तमान में महंगाई को देखते हुए तीन हजार रुपये गुजारा-भत्ता अधिक नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि याची की पत्नी स्वयं का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में पति का धार्मिक और कानूनी दायित्व है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करे। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा, कल्याण डे चौधरी बनाम रीता डे चौधरी फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गुजारा-भत्ता राशि पति की शुद्ध आय की 25 प्रतिशत हो सकती है। ऐसे में तीन हजार रुपये अधिक नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।