Himachal:राज्यपाल शुक्ल बोले- चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित रखना कानूनी मामला - Himachal: Governor Shukla Said That Denying The Right To Contest Elections Is A Legal Matter.

Himachal:राज्यपाल शुक्ल बोले- चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित रखना कानूनी मामला - Himachal:  Governor Shukla Said That Denying The Right To Contest Elections Is A Legal Matter.

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 पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की घोषणा पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का बड़ा बयान सामने आया है। शनिवार को राज्यपाल ने कहा कि चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित रखना कानूनी मामला है। अगर सरकार यह फैसला लेती है तो यह अदालत का विषय बन जाएगा। पंचायती राज मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एलान किया था कि प्रदेश में चिट्टे की तस्करी में संलिप्त लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। कैबिनेट बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि सरकार अगर ऐसा निर्णय लेती है तो यह बहुत स्वीकार्य नहीं होगा। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन में हमने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया था कि आप अपने स्तर पर नशों के खिलाफ कार्य करें। उस समय पंचायत प्रतिनिधियों ने भी कहा कि नशों में संलिप्त लोगों को पंचायत की सुविधाओं से वंचित कर देंगे, मैंने उस समय भी कहा कि यह गलत होगा। यह आप नहीं कर सकते। अब अगर सरकार भी ऐसा फैसला लेती है तो यह सही नहीं होगा। किसी को बंधक नहीं बनाया जा सकता, सभी स्वतंत्र है। 

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आरट्रैक में बोले-सैनिक के पीछे परिवार का मौन बालिनान है सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी ताकत
 सेना दिवस समारोह पर मुख्यालय आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रैक) ने नॉकड्रिन ऑफिसर्स मेस शिमला में एट होम कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और भारतीय सेना के सर्वोच्च बलिदान, अदम्य साहस और अटूट संकल्प की सराहना की। हर सैनिक के पीछे उसके परिवार का मौन बलिदान होता है, जो सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य का लगभग हर गांव सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा का साक्षी है। इससे पहले आरट्रैक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने राज्यपाल का स्वागत किया। ट्रेनिंग कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने सेना दिवस के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया और हिमाचल प्रदेश के वीर सैनिकों के बलिदान को स्मरण किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित भारतीय सेना की आधुनिक, उच्च-प्रौद्योगिकी युद्ध लड़ने और जीतने की क्षमता पर भी चर्चा की। 

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