हिमाचल:ऐसे तो बिना स्कूल के ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे पदोन्नत हेडमास्टर, लेक्चरर, जानें पूरा मामला - Himachal: Promoted Headmasters And Lecturers Will Retire Without Schools; Learn The Full Story.
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हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में हाल ही में प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत किए गए कई हेडमास्टर और लेक्चरर असमंजस की स्थिति में हैं। पदोन्नति मिलने के बावजूद न तो उन्हें अभी तक नए स्कूल आवंटित किए गए हैं और न ही नया दायित्व सौंपा गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि शीघ्र पोस्टिंग नहीं मिली तो कई अधिकारी जिनकी आयु सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुकी है। वे बिना किसी स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में कार्य किए ही सेवानिवृत्त हो सकते हैं। इसके साथ ही पदोन्नति के बाद वेतन आहरण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में यह तय नहीं हो पा रहा है कि वेतन किस पद के विरुद्ध आहरित किया जाए और संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) कौन होगा। जिन स्कूलों में स्कूलों में सेवारत प्रिंसिपल हाल ही में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वहां सेवारत टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के वेतन में भी विलंब हो सकता है। दरअसल, दिसंबर 2025 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग के माध्यम से कुल 779 हेडमास्टरों और लेक्चररों को प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत किया है। इनमें 512 हेडमास्टर और 267 लेक्चरर शामिल हैं। यह पदोन्नति विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की सिफारिशों के आधार पर की गई है, जिसकी अधिसूचना शिक्षा सचिव की ओर से जारी की गई थी। इसके साथ ही पदोन्नति आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि सभी पदोन्नत अधिकारी वर्तमान शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक अपने मौजूदा विद्यालयों में ही कार्यरत रहेंगे, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शैक्षणिक सत्र पूरा होने के बाद ही उन्हें नई प्रिंसिपल पोस्टिंग पर ज्वाइन करना होगा। हालांकि, इस अंतरिम अवधि में प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
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प्रदेश के कई शिक्षा उपनिदेशकों ने हेडमास्टर और लेक्चरर संवर्ग से हाल ही में पदोन्नत किए गए प्रधानाचार्यों के वेतन आहरण एवं भुगतान व्यवस्था को लेकर शिक्षा निदेशालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। उपनिदेशकों ने पत्र में बताया है कि पदोन्नत प्रधानाचार्यों ने ई-मेल और व्यक्तिगत रूप से ज्वाइनिंग रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। पदोन्नति आदेशों की शर्तों के अनुसार उन्हें वर्तमान शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक अपने मौजूदा विद्यालयों में ही कार्य करना है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि वर्तमान माह का वेतन किस पद के अंतर्गत आहरित किया जाए और संबंधित डीडीओ कौन होगा। स्पष्ट निर्देशों के अभाव में वेतन भुगतान प्रक्रिया में विलंब की आशंका जताई गई है। उपनिदेशकों ने आग्रह किया है कि शीघ्र आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि पदोन्नत अधिकारियों का वेतन समय पर और सुचारु रूप से सुनिश्चित किया जा सके।