Hp News:बैंकों में बढ़ते ब्याज से ऋण नहीं ले रहे हिमाचल के लोग, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में खुलासा - Hp People Not Taking Loans Due To Rising Interest Rates In Banks State Level Bankers Committee Meeting

Hp News:बैंकों में बढ़ते ब्याज से ऋण नहीं ले रहे हिमाचल के लोग, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में खुलासा - Hp People Not Taking Loans Due To Rising Interest Rates In Banks State Level Bankers Committee Meeting

विस्तार Follow Us

महंगी ब्याज दरों का हिमाचल प्रदेश में बैंकों से ऋण लेने की प्रवृत्ति पर विपरीत असर पड़ा है। प्रदेश में लोग जितनी तेजी से बैंकों में धनराशि जमा कर रहे हैं, उसके मुकाबले ऋण उठाने की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। इसका सीधा प्रमाण ऋण जमा अनुपात (क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो) में आई लगातार गिरावट है।

और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

जून 2019 के मुकाबले सितंबर 2025 तक प्रदेश का सीडी रेशियो 5.99 फीसदी घट चुका है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की हालिया बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में प्रदेश का सीडी रेशियो 45.92 फीसदी था, जो 2025 की तीसरी तिमाही में घटकर 39.93 फीसदी पर आ गया है। चिंता की बात यह है कि प्रदेश के सात जिलों में यह अनुपात लगातार कमजोर बना हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और निवेश पर भी असर पड़ने लगा है।

विज्ञापन विज्ञापन

बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि सात जिलों बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति, मंडी और ऊना में ऋण जमा अनुपात 40 फीसदी से कम है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में लोगों की बचत प्रवृत्ति बढ़ी है। लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर धनराशि जमा तो कर रहे हैं, लेकिन ऊंची ब्याज दरों, आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के कारण ऋण लेने से परहेज कर रहे हैं। खासकर कृषि, स्वरोजगार, एमएसएमई और आवास ऋण जैसे क्षेत्रों में मांग पहले के मुकाबले कमजोर पड़ी है। एसएलबीसी की समीक्षा में यह भी उजागर हुआ कि प्रदेश के सात जिलों में सीडी रेशियो राज्य औसत से काफी नीचे है। इन जिलों में बैंकों द्वारा जमा धनराशि का अपेक्षित स्तर पर ऋण के रूप में उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे स्थानीय विकास परियोजनाओं, रोजगार सृजन और उद्यमिता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

बैठक में वित्त सचिव अभिषेक जैन ने सीडी रेशियो में गिरावट पर नाराजगी जताई। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, कृषि, बागवानी, स्वरोजगार और लघु उद्योगों के लिए ऋण वितरण को बढ़ाएं। जिलावार विशेष कार्ययोजना तैयार कर कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में ऋण प्रवाह तेज करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सीडी रेशियो किसी भी राज्य की आर्थिक सेहत का अहम पैमाना होता है।

लगातार गिरता अनुपात यह संकेत देता है कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में पूंजी का प्रवाह सुस्त हो रहा है। यदि जमा धनराशि का उपयोग स्थानीय स्तर पर ऋण के रूप में नहीं होगा, तो विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है। उधर, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बीते साल रेपो दर में भारी कटौती के बाद भी कर्ज लेने वाले ग्राहकों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाया है।

View Original Source