I-pack Row:चुनाव से पहले बंगाल में बवाल, सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद Tmc-bjp की जुबानी जंग; किसने क्या कहा? - Supreme Court Notice Ed Petition West Bengal Government Ipac Investigation Centre Vs State Bjp Statement
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पश्चिम बंगाल में चुनाव रणनीतिकार संस्था आई-पैक के ठिकानों पर ईडी के छापों को लेकर गुरुवार को टीएमसी और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। यह विवाद तब और गहरा गया जब सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के इस आरोप को माना कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है और राज्य पुलिस को रेड की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
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टीएमसी ने क्या कहा?
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए की गई है। उन्होंने सवाल उठाया, "यह 2020 का मामला है। पांच-छह साल तक एजेंसी क्या कर रही थी? चुनाव से ठीक पहले वे अचानक क्यों जाग गए?"
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घोष ने कहा कि आई-पैक निदेशक प्रतीक जैन के पास पार्टी के चुनाव अभियान का डेटा और रणनीति है। बीजेपी ईडी का इस्तेमाल करके इस जानकारी को हासिल करना या बाधित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब प्रशांत किशोर पार्टी से जुड़े थे तब छापे नहीं पड़े, लेकिन अब प्रतीक जैन को निशाना बनाया जा रहा है। घोष ने जोर देकर कहा कि ममता बनर्जी ने पार्टी के डेटा की सुरक्षा के लिए विरोध किया था और जनता सब देख रही है कि यह एक "राजनीतिक तलाशी" है।
बीजेपी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ममता बनर्जी पर पलटवार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के काम में रुकावट डालना "अस्वीकार्य और अक्षम्य" है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री खुद आई-पैक दफ्तर पहुंचीं और पुलिस ने जानबूझकर ईडी को रोका। शेखावत ने कहा, "लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना भारत की आत्मा पर हमला है।" उन्होंने 2019 की घटना याद दिलाई जब ममता ने सीबीआई कार्रवाई में दखल दिया था। मंत्री ने आरोप लगाया कि संदेशखाली से लेकर केंद्र की योजनाओं में भ्रष्टाचार तक, राज्य सरकार ने लगातार जांच रोकने की कोशिश की है।
वहीं इस मामले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। घोष ने कहा, "उन्होंने ईडी की कार्रवाई में जिस तरह से व्यवधान डाला और जिस तरह से वे उनकी फाइलें छीनकर ले गईं, यह किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। लोकतंत्र में इसकी कोई जगह नहीं है। यह बहुत बड़ा गुनाह है।"
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कोर्ट की सख्ती
यह राजनीतिक खींचतान आठ जनवरी को आई-पैक ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पर हुई रेड के बाद शुरू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की भी जांच करेगा कि क्या राज्य पुलिस किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय जांच में दखल दे सकती है।
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