If You Use These 5 Methods To Discipline Your Child They Ll Learn Nothing,बच्चे को इन 4 तरीकों से सिखा रहे हैं अनुशासन, तो वह सीखेगा कुछ नहीं, बल्कि जिंदगी भर के लिए दूर जरूर हो सकता है - if you use these 4 methods to discipline your child they ll learn nothing and may stay distant forever - Family News
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा डिसिप्लिन में रहे और अपनी जिम्मेदारियों को समझे। ऐसे में यह गुण सिखाने के लिए कभी-कभी पेरेंट्स को सख्ती भी बरतनी पड़ती है ताकि बच्चे सही ढंग से अनुशासित रह सकें और अच्छी आदतें विकसित कर सकें।
हालांकि, कई बार माता-पिता अनुशासन सिखाने के लिए ऐसे तरीके अपनाते हैं, जो बच्चे के दिल और दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इन तरीकों से बच्चा कुछ सीखता नहीं, बल्कि कई बार बातों को अपने मन में बिठा लेता है और जिंदगी भर के लिए उनसे दूर हो जाता है। आखिर, वे कौन से तरीके हैं जिन्हें माता-पिता कभी भी अपनाने से बचें?
(सभी तस्वीरें-सांकेतिक हैं)
बच्चे पर चीखना-चिल्लाना या उसे डांटना
सबसे पहला गलत तरीका यही है कि बच्चे की किसी भी गलती पर उस पर चीखना, चिल्लाना या डांटना। जब बच्चे को उसके गलत व्यवहार पर इस तरह डांटा जाता है, तो उसका नाजुक मन उन बातों को ठीक से समझ नहीं पाता और वह डरने लगता है। धीरे-धीरे वह छोटी-छोटी बातों पर सवाल पूछना या अपनी प्रॉब्लम बताना भी बंद कर देता है, क्योंकि उसे डर रहता है कि कहीं फिर से चिल्लाया न जाए। वहीं, कुछ बच्चे तो इन बातों को अपने दिल से लगाकर बैठ जाते हैं और फिर भविष्य में यही माता-पिता से दूरी की वजह बनते हैं।
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बच्चों पर पाबंदी लगाना
अनुशासन सिखाने का दूसरा गलत तरीका है बच्चे से उसकी मनपसंद चीजें छीन लेना, जैसे- खिलौने ले लेना, टीवी या वीडियो टाइम बंद कर देना, बाहर जाने से रोकना या ट्रीट्स न देना। ऐसी पाबंदियां लगाने से बच्चे अपनी गलती समझने के बजाय सिर्फ इस बात पर ध्यान देने लगते हैं कि उनसे क्या-क्या छीन लिया गया है। इसका असर यह होता है कि वे गुस्सा, नाराजगी और झुंझलाहट महसूस करने लगते हैं। कई बार तो बच्चा ज्यादा रोक-टोक की वजह से बगावती होने लगता है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए इस तरह के तरीकों से बचना बेहतर है।
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मार-पीटकर कर अनुशासन में रखने की कोशिश करना
कई माता-पिता बच्चों की गलतियों को सुधारने के लिए एक और तरीका अपनाते हैं और कभी-कभी मार देते हैं या थप्पड़ मार देते हैं। लेकिन ऐसा करते समय वे यह भूल जाते हैं कि इसका बच्चों पर कितना गहरा असर पड़ता है। कई स्टडीज से पता चलता है कि मार-पीट बच्चों में आक्रामकता, चिंता और लंबे समय तक बनी रहने वाली नाराजगी को बढ़ा सकती है। इसलिए भले ही उस पल ऐसा लगे कि यह तरीका ‘काम कर गया’ और बच्चा सुधर गया लेकिन यह अक्सर बच्चे के मन पर ऐसे घाव छोड़ता है, जो बेहद मुश्किलों के बाद भी नहीं भरते।
बच्चे को इमोशनल पनिशमेंट देना
इमोशनल पनिशमेंट कई बार फिजिकल पनिशमेंट से भी ज्यादा खतरनाक साबित होता है। इसमें माता-पिता बच्चे को न तो डांटते हैं और न ही मारते हैं, बल्कि उससे दूरी बना लेते हैं या उससे बात करना ही छोड़ देते हैं। कई बार वे यह कहकर खुद को सही ठहराते हैं कि ‘उसे उसके हाल पर छोड़ दो, तभी अक्ल ठिकाने आएगी, लेकिन इस तरह का व्यवहार बच्चे के दिल और दिमाग पर गहरा असर डालता है। बच्चे को यह महसूस होने लगता है कि उससे प्यार कम हो गया है या वह अपने माता-पिता के लिए जरूरी नहीं रहा। इससे उसका आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है और वह अंदर-ही-अंदर खुद को दोष देने लगता है।
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बच्चों को गलतियों से सीखने का मौका दें
माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को सही आदतें सिखाने और अनुशासन में रखने के लिए हमेशा सजा देना जरूरी नहीं होता। इसके बजाय सही मार्गदर्शन, धैर्य और कभी-कभी बच्चों को उनकी गलतियों से सीखने का मौका देना ज्यादा प्रभावी होता है। बच्चे तब बेहतर सीखते हैं जब वे अपनी की गई गलतियों के नतीजों को समझते हैं, न कि तब जब वे डर के कारण कुछ करते हैं। इसलिए बच्चों को प्यार, समझ और इमोशनल सिक्योरिटी देना बेहद जरूरी है, खासकर तब भी जब वे गलती कर बैठें।
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