देवी अहिल्या प्रतिमा विवाद ने पकड़ा तूल:बनारस के मणिकर्णिका घाट की तोड़फोड़ पर फूटा लोगों का गुस्सा; तस्वीरें - Indore News Controversy Erupts Over Damage To Devi Ahilyabai Holkar Statue At Manikarnika Ghat In Varanasi

देवी अहिल्या प्रतिमा विवाद ने पकड़ा तूल:बनारस के मणिकर्णिका घाट की तोड़फोड़ पर फूटा लोगों का गुस्सा; तस्वीरें - Indore News Controversy Erupts Over Damage To Devi Ahilyabai Holkar Statue At Manikarnika Ghat In Varanasi

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सार-  बनारस के मणिकर्णिका घाट में विकास कार्य के दौरान मंगलवार को देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को तोड़ दिया गया था। इस बीच जेसीबी से करीब 300 साल पुराना घाट भी ध्वस्त कर दिया गया था। जैसे ही यह जानकारी पाल और मराठीभाषी परिवार को लगी तो विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल होने लगीं। इंदौर में भी कड़ी निंदा की गई। लोगों ने कार्रवाई की मांग की। वहीं, मामले को तूल पकड़ता देख प्रशासन हरकत में आया। चलिए पूरे विवाद पर विस्तार से जानते हैं।

विज्ञापन Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi 1 of 6 मणिकर्णिका घाट की तोड़फोड़ - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Reactions

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बीते मंगलवार (13 जनवरी) को बनारस के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और घाट के एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने से विवाद गहरा गया। इस घटना को लेकर इतिहासकारों और समाज के विभिन्न वर्गों में विरोध देखा जा रहा है। साथ ही सिस्टम पर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्योंकि एक ओर सरकार लोकमाता की त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मना रही है। वहीं, दूसरी ओर बनारस से आई तस्वीर लोकआस्था पर गहरी चोट कर रही है। चलिए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं क्या है यह पूरा मामला?  loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi 2 of 6 मणिकर्णिका पर ध्वस्तीकरण का वायरल हुआ था वीडियो - फोटो : वीडियो ग्रैब बनारस: वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन आया हरकत में
काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में बुलडोजर चलता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसे कॉरिडोर विकास के नाम पर मंदिर तोड़े जाने से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है। यह आठ सेकेंड का वीडियो अकांक्षा सिंह रघुवंशी के सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया, जिसमें आवाज सुनाई दे रही है कि विकास के नाम पर विनाश, देखिए कैसे मंदिर गिराए जा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें समझाकर प्रदर्शन समाप्त कराया।

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कितना प्राचीन है घाट
मणिकर्णिका घाट का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में करवाया गया था। अपनी पौराणिक मान्यता के कारण यह प्रसिद्ध 84 घाटों में शामिल है। धर्मशास्त्र का इतिहास, जिसके लेखक पांडुरंग वामन काणे हैं, के अनुसार शिव के कान की मणि इसी घाट पर किसी कुंड में गुम हुई थी, इसलिए इस घाट को मणिकर्णिका घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट पर शवों का दाह संस्कार होता है। विज्ञापन विज्ञापन Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi 3 of 6 रिचर्ड होलकर ने घाट तोड़े जाने की निंदा की। - फोटो : अमर उजाला होल्कर राजवंश की तीसरी शासिका थीं देवी अहिल्याबाई
देवी अहिल्याबाई एक न्यायप्रिय, धार्मिक और दानवीर होल्कर राजवंश की तीसरी शासिका थीं, जिनका कार्यकाल 28 वर्ष पांच माह (1767-1795) रहा। दो सौ तीस वर्ष बाद भी उनकी कार्यप्रणाली, उनके व्यक्तित्व और दानशीलता को स्मरण किया जाता है। हाल ही में देवी अहिल्याबाई का त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मनाया गया था। अहिल्याबाई द्वारा अपने कार्यकाल में कराए गए कार्य शानो-शौकत और सत्ता के वैभव के नहीं थे, बल्कि वे लोक और जन-उपयोगी थे। इसकी वजह से पाल और मराठीभाषी परिवार गुस्से में हैं। उन्होंने 300 साल पुराने घाट को तोड़ने का विरोध किया है।

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पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मणिकर्णिका घाट से जुड़े मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस संबंध में उन्हें लोगों द्वारा वीडियो क्लिपिंग भेजी गई है। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में उन्हें यही लगा कि वहां कोई विकास कार्य चल रहा होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित की है और क्षेत्र में व्यापक विकास कार्य किए गए हैं।

सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली है और वाराणसी में रहने वाले लोगों से भी बातचीत की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य चल रहा था, जिसके दौरान ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। इसी दौरान दुर्घटनावश कुछ मूर्तियों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर स्थान पर ट्रस्ट द्वारा मूर्तियों का संरक्षण कर पाना संभव नहीं होता और हल्के धक्के से भी पुरानी संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है। मणिकर्णिका घाट शवों के दाह संस्कार का प्रमुख स्थल है और वहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट रूप से कहना कठिन है कि कौन-सी मूर्तियां टूटी हैं, क्योंकि देवी अहिल्याबाई स्वयं अपनी मूर्तियां स्थापित नहीं कराती थीं। फिर भी जो भी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें पुनः ठीक किया जाएगा।

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प्रसिद्ध इतिहासकार और दशपुर प्राच्य शोध संस्थान के निदेशक डॉ. कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में लोक और जन-उपयोगी कार्य किए। देवी शिवभक्त थीं, इसलिए उन्होंने मणिकर्णिका घाट का कार्य करवाया था। जहां तक उनकी प्रतिमा का सवाल है, उसे कार्य से पहले ही संरक्षित कर लेना था ताकि कोई नुकसान न हो। यह बहुत दुःखद है। होल्कर इतिहासकार और पूर्व कुलपति डॉ. शिवनारायण यादव का कहना है कि इतिहास की धरोहर को संरक्षित किए जाने के बजाय उन्हें नष्ट किया जाना गलत है।

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