Indore News:mppsc के बाहर रात भर से धरने पर छात्र, हाईकोर्ट से अनुमति के बाद किया घेराव - Indore News Mppsc Aspirants Start Nyay Yatra 2.0 Protest Outside Commission Office Over 10 Demands
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इंदौर स्थित मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर शनिवार देर रात से अभ्यर्थियों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के नेतृत्व में शुरू हुआ यह धरना प्रदर्शन अगले चार दिनों तक अनवरत जारी रहने वाला है। कड़ाके की ठंड के बीच बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं आयोग के मुख्य द्वार पर जमे हुए हैं। अभ्यर्थियों ने न्याय यात्रा 2.0 के तहत अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया है। रात भर अभ्यर्थी अलाव जलाकर आयोग के बाहर ही डटे रहे और उन्होंने वहीं अपने बिस्तर लगा लिए हैं।
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हाईकोर्ट से मिली शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति
इस बार अभ्यर्थियों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए न्यायालय से अनुमति प्राप्त की है। एनईवाययू के संयोजक राधे जाट ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने रिट याचिका संख्या WP-3025-2026 के माध्यम से अनुच्छेद 19 के तहत इस आंदोलन को मंजूरी प्रदान की है। इस अनुमति के बाद प्रदेश भर के कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और छात्र संगठनों से जुड़े युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने के लिए इंदौर पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए पूरी शालीनता से अपनी बात शासन तक पहुंचाएंगे।
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पिछले वादों को पूरा न करने का आरोप
अभ्यर्थियों में मुख्य रूप से इस बात को लेकर नाराजगी है कि 13 महीने पहले दिसंबर 2024 में हुए आंदोलन के समय प्रशासन ने जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। छात्रों का दावा है कि पिछली बार करीब 6 से 7 मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उनमें से केवल दो ही लागू की जा सकीं। इनमें निगेटिव मार्किंग और इंटरव्यू में सरनेम हटाने जैसे नियम शामिल थे। युवाओं का कहना है कि उनकी लगभग 90 प्रतिशत मांगें अभी भी अधूरी हैं, जिसके कारण उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
इंटरव्यू अंकों में कटौती की मुख्य मांग
आंदोलनकारी छात्रों की सबसे महत्वपूर्ण मांग राज्य सेवा परीक्षा के साक्षात्कार के अंकों को कम करने की है। वर्तमान में इंटरव्यू के लिए 185 अंक निर्धारित हैं, जिसे अभ्यर्थी बहुत अधिक मान रहे हैं। उनका तर्क है कि इतने ज्यादा अंक होने से चयन प्रक्रिया में पक्षपात की संभावना बढ़ जाती है। छात्रों की मांग है कि साक्षात्कार के अंकों को घटाकर 100 कर दिया जाए ताकि मुख्य परीक्षा की मेहनत का सही मूल्यांकन हो सके और भर्ती प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आए।
पदों की संख्या बढ़ाने और एफआईआर का विरोध
परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने पदों की घटती संख्या पर भी गहरा रोष व्यक्त किया है। अभ्यर्थी अभिषेक जाट के अनुसार, मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद इस साल केवल 156 पद ही घोषित किए गए हैं, जो प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वहीं रणजीत किसानवंशी ने बताया कि जुलाई में जब उन्होंने आयोग को मांगों की याद दिलाई थी, तो उन पर एफआईआर दर्ज कर दी गई थी। अभ्यर्थियों का कहना है कि रात भर बीत जाने के बाद भी आयोग का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने या ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा है, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई है।