क्या है IRGC? जिसके रहते ईरान में तख्तापलट करना है टेढ़ी खीर- लोगों के बीच में रह ऐसे करती है काम
Hindi World HindiWhat Is Irgc It Makes It Difficult To Carry Out A Coup In Iran It Operates Among The People क्या है IRGC? जिसके रहते ईरान में तख्तापलट करना है टेढ़ी खीर- लोगों के बीच में रह ऐसे करती है काम
IRGC और बासिज, ईरान की धार्मिक सत्ता के वे स्तंभ हैं जो नियमित सेना के समानांतर काम करते हुए धार्मिक व्यवस्था की रक्षा करते हैं. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इनका कठोर और हिंसक रवैया किसी भी जन-विद्रोह को कुचलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिस वजह से ईरान में तख्तापलट करना लगभग नामुमकिन सा माना जाता है.
Published: January 13, 2026 1:02 PM IST
By Satyam Kumar
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ईरान में स्थापित धार्मिक सत्ता के खिलाफ सड़क पर उतरे नागरिक
ईरान की सत्ता संरचना दुनिया के अन्य देशों से काफी अलग है. यहां पारंपरिक सेना के साथ-साथ दो ऐसे शक्तिशाली संगठन काम करते हैं, जो सरकार और सर्वोच्च नेता की ढाल माने जाते हैं. ईरान में जब भी सरकार विरोधी प्रदर्शन होते हैं, IRGC और बासिज फोर्स को सबसे पहले आगे किया जाता है. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए बासिज के सदस्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चाकू, डंडों और घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं, फिर उसी भीड़ का हिस्सा बनकर छिप जाते हैं. आइए जानते हैं कि IRGC और बासिज क्या हैं और ये धार्मिक सत्ता के लिए क्यों जरूरी हैं.
IRGC क्या है और इसका गठन क्यों हुआ?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं की रक्षा करना नहीं, बल्कि देश की इस्लामी व्यवस्था और राजनीतिक ढांचे को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाना है. यह सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) को रिपोर्ट करती है और धार्मिक सत्ता को बरकरार रखने में इसकी अहम भूमिका है.

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देश की आर्मी से इतर कैसे काम करती है ये फोर्स?
ईरान में एक नियमित सेना अर्तेश (Artesh) है जिसका काम विदेशी आक्रमण से सीमाओं की रक्षा करना है. वहीं, IRGC उसके समानांतर अपनी अलग थल सेना, वायु सेना और नौसेना रखती है. यह विभाजन जानबूझकर किया गया है ताकि अगर कभी नियमित सेना विद्रोह की कोशिश करे, तो IRGC उसे कुचल सके. IRGC के पास सेना से अधिक आधुनिक हथियार और बजट होता है, क्योंकि उनका मुख्य काम क्रांति की रक्षा करना है.
तख्तापलट रोकने का मजबूत तंत्र
IRGC और बासिज का प्राथमिक काम ही किसी भी आंतरिक विद्रोह को दबाना है. इनकी अपनी खुफिया एजेंसी और जासूसी तंत्र है जो न केवल जनता पर, बल्कि नियमित सेना के अधिकारियों पर भी नजर रखती है. इस मल्टीलेयर्ड निगरानी की वजह से कोई भी गुप्त साजिश सफल नहीं हो पाती. यही कारण है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें अक्सर नाकाम हो जाती हैं.
बासिज का घर-घर तक फैला नेटवर्क
बासिज एक स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल (Paramilitary Force) है, जो IRGC के अधीन काम करता है. इसका नेटवर्क ईरान के हर शहर, मोहल्ले और स्कूल-कॉलेज तक फैला हुआ है. बासिज के सदस्य आम जनता के बीच घुले-मिले रहते हैं, जिससे किसी भी तरह के विरोध या विद्रोह की भनक शासन को तुरंत लग जाती है. ये लोग सिविल ड्रेस में भी काम करते हैं, जिससे इनकी पहचान करना मुश्किल होता है.
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विचारधारा के प्रति अटूट वफादारी
IRGC केवल एक सैन्य बल नहीं है, बल्कि इसका ईरान की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त कब्जा है. निर्माण, ऊर्जा, परिवहन और दूरसंचार जैसे बड़े क्षेत्रों में इसकी कंपनियां काम करती हैं. यह आर्थिक ताकत उन्हें इतना शक्तिशाली बनाती है कि सत्ता में उनकी भागीदारी और वफादारी हमेशा बनी रहती है. वे आर्थिक रूप से इतने आत्मनिर्भर हैं कि उन पर प्रतिबंधों का भी असर कम होता है. इन संगठनों के सदस्यों को वैचारिक रूप से बहुत मजबूत बनाया जाता है. उनके लिए सर्वोच्च नेता की आज्ञा ही सर्वोपरि है. यह धार्मिक और वैचारिक जुड़ाव उन्हें किसी भी लालच या बाहरी दबाव से दूर रखता है, जिससे शासन के भीतर फूट डालना लगभग नामुमकिन हो जाता है. ये संगठन धार्मिक सत्ता को चुनौती देने वाले किसी भी विचार को राष्ट्रद्रोह मानते हैं.
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Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
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