Israel Us Iran Strike News,इजरायल ने ईरान पर अमेरिकी हमले का किया था विरोध, सत्ता परिवर्तन का बेहतरीन मौका क्यों गंवाया? बड़े डर का खुलासा - israel opposed us attack on iran why miss this golden opportunity for regime change major fear revealed - Uae News
अमेरिकी सूत्रों ने खुलासा किया है कि इजरायल ने ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले का विरोध किया था। जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला करने से परहेज किया है। अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते इजरायल के टॉप नेताओं ने ट्रंप प्रशासन को ईरान पर हमला नहीं करने के लिए संदेश भेजा था। हालांकि, इसके पीछे बताया गया है कि इससे इजरायल के पास ईरान के हमले को रोकने के लिए मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी होना नहीं है। या फिर इजरायल को अपने एयर डिफेंस सिस्टम के फेल होने का भी डर नहीं नहीं है। इजरायल का मानना था कि अगर ईरान दुर्लभ स्थिति में भी अगर 700 मिसाइलों तक हमला करता है, तो जून महीने में किए गये 500 बैलिस्टिक मिसाइल हमले के समय जितना नुकसान हुआ था, करीब करीब उतना ही नुकसान इस बार भी होता।
इजरायली अधिकारियों का मानना था कि अगर अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन से ईरान में सरकार गिरती, तो इजरायल को जितना नुकसान होता, वो उसे मंजूर होता। ये नुकसान ना सिर्फ उसे स्वीकार्य होती, बल्कि ईरान में सरकार का गिरना उसके लिए फायदेमंद भी था। हालांकि इजरायली अधिकारियों का मानना था कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की स्थिति में उसके एयर डिफेंस सिस्टम पर अभूतपूर्व प्रेशर पड़ता। इजरायल ने अपने घरेलू और अमेरिकी एयर डिफेंस को मिलाकर, मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया हुआ है।![]()
इजरायल ने अमेरिका को ईरान पर हमले से क्यों रोका?
ynetnews न्यूज की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इजरायल का तर्क बिल्कुल अलग था। इजरायली अधिकारियों ने तर्क किया था कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो जिस तरह से हमले की योजना बनाई गई थी, उससे ईरान की सरकार को गिराने की योजना कामयाब नहीं हो पाती। जबकि इस हमले की वजह से होने वाला नुकसान काफी ज्यादा हो सकता था। मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच सकता था और कई दिनों तक ईरान की सरकार अस्थिर रह सकती थी। लेकिन ईरान में सरकार का सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता था। इसीलिए इजरायल ने अमेरिकी प्रशासन से ईरान पर हमला करने का विरोध किया था। ट्रंप प्रशासन ने भी ईरान पर इजरायल के फैसले को सही माना और हमला नहीं किया गया। इजरायल को डर था कि सरकार गिरने के बजाए एक लंबा संघर्ष शुरू होने का खतरा बन सकता था।![]()
ईरान पर हमले का खतरा टला नहीं, बढ़ा है!
इजरायल में किए गये आकलन के मुताबिक, अब अमेरिका अपनी रणनीति बदल रहा है। अमेरिका ने अब ईरान की घेराबंदी के लिए अपनी क्षेत्रीय सेना को और मजबूत करने का फैसला लिया है। अमेरिका पहले ही अपने 2 एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन और फोर्ड को फारस की खाड़ी की तरफ रवाना कर चुका है। इसके अलावा अमेरिका ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया आईलैंड पर कार्गो विमानों को भी तैनात करना शुरू कर दिया है। वहीं, खाड़ी देशों में जहां जहां अमेरिकी सैन्य ठिकानें हैं, वहां एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। ईरान के अंदर भी इंटेलिजेंस को और तेज किया जा रहा है। अमेरिकी एजेंसियां ईरान के अंदर और ज्यादा कमजोरियों पर वार कर रहे हैं, जिनमें आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और जातीय कमजोरियों पर ध्यान दिया जा रहा है। ऐसा होने से सैन्य हमला होने की स्थिति में सरकार के अस्थिर होने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।दूसरी तरफ इजरायल डिफेंस फोर्स भी ऑपरेशनल तैयारियों को हाई लेवल बनाए हुआ है। हर दिन तैयारी को और ज्यादा अपग्रेड और एडवांस किया जा रहा है। ईरान के हमले की स्थिति में बचाव के और ज्यादा मजबूत उपाए किए जा रहे हैं। कई थिएटर वाले हालात के लिए एयर, इंटेलिजेंस और साइबर फोर्स की तैयारी को मजबूत किया जा रहा है। रविवार को नेगेव में नेवातिम एयरबेस पर तीन नए F-35 एडिर फाइटर जेट उतरे हैं, जिसके बाद इजरायली वायु सेना के बेड़े में 48 जेट हो गए हैं। IDF नए जेट्स को जल्द से जल्द पूरी तरह से ऑपरेशनल स्थिति में लाने के लिए तेजी से काम कर रहा है, जिसमें सिस्टम इंटीग्रेशन, टीम ट्रेनिंग और उन्हें मौजूदा ऑपरेशनल प्लान में शामिल करना शामिल है।