ISRO को कैसे लगा बड़ा झटका? PSLV मिशन में चूक से अंतरिक्ष में खो गए 16 सैटेलाइट! जानें पूरी कहानी
Hindi India HindiHow Isro Suffer A Major Setback Pslv Mission Error Resulted In The Loss Of 16 Satellites In Space Know Full Story ISRO को कैसे लगा बड़ा झटका? PSLV मिशन में चूक से अंतरिक्ष में खो गए 16 सैटेलाइट! जानें पूरी कहानी
इसरो का PSLV-C62 मिशन तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण विफल हो गया, जिससे DRDO के जासूसी उपग्रह समेत 16 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में खो गए.
Published: January 12, 2026 5:16 PM IST
By Satyam Kumar
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PSLV C62 मिशन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही. सोमवार को श्रीहरिकोटा से रवाना हुआ इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C62 एक बड़ी तकनीकी चूक का शिकार हो गया. अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का वर्कहॉर्स (Workhorse) कहा जाने वाला यह रॉकेट अपनी सटीक उड़ान के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार तीसरे चरण में आई खराबी ने करोड़ों के लागत के मिशन को मलबे में तब्दील कर दिया.
ISRO से कहां हुई भारी चूक?
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे जब 44.4 मीटर ऊंचे PSLV रॉकेट ने उड़ान भरी, तो वैज्ञानिकों के चेहरे पर मुस्कान थी. रॉकेट के पहले दो चरणों ने बिल्कुल योजना के अनुसार काम किया, लेकिन असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब रॉकेट अपने तीसरे चरण (Third Stage) के अंत में था. इसरो चीफ वी. नारायणन के अनुसार, इस दौरान यान में कुछ असामान्य हलचल देखी गई, जिससे रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया.
मिशन की विफलता की वजह
तीसरे चरण के अंत में रॉकेट की गति और दिशा में विचलन (Deviation) देखा गया. इसरो अब डेटा का विश्लेषण कर रहा है कि आखिर यह गड़बड़ी इंजन की वजह से थी या कंट्रोल सिस्टम की खराबी से. वहीं, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य 1,696 किलोग्राम के EOS-N1 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को स्थापित करना था. इसके साथ ही DRDO का अन्वेषा (Anvesha) सैटेलाइट भी था, जो देश की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा था. इसरो के लिए चिंता की बात यह है कि साल 2025 में भी PSLV का एक मिशन फेल हुआ था और वह भी तीसरे चरण में ही अटका था, लगातार दूसरी बार एक ही स्टेज में समस्या आना इसरो के लिए बड़ी चुनौती है.
अंतरिक्ष में खो गए 16 स्पेस यान
इस विफलता ने न केवल भारत बल्कि कई अन्य देशों और स्टार्टअप्स को बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका दिया है. कुल 16 सैटेलाइट्स इस मिशन का हिस्सा थे जो अब अंतरिक्ष में गुम हो चुके हैं. इस मिशन के विफल रहने सेनिजी स्टार्टअप्स का नुकसान हुआ. हैदराबाद की ध्रुव स्पेस के थाइबोल्ट-3 और लाचित (LACHIT) जैसे कई महत्वपूर्ण सैटेलाइट्स इस मिशन में खो गए. इनमें से कुछ सैटेलाइट्स पर एआई (AI) मॉडल चलाने की योजना थी. वहीं, छात्रों की मेहनत पर पानी फिरा. गुजरात के लक्ष्मण ज्ञानपीठ और नेपाल के अंतरिक्ष प्रतिष्ठान द्वारा तैयार किए गए छात्रों के सैटेलाइट्स (संस्कारसैट और मुनाल) भी अपनी कक्षा (Orbit) तक नहीं पहुंच सके.
ब्राजील का मिशन भी फेल
ब्राजील की कंपनी ऑलटूस्पेस (AlltoSpace) ने अपने 5 सैटेलाइट्स इस मिशन पर भेजे थे. इनमें मछुआरों की सुरक्षा और कृषि डेटा इकट्ठा करने वाले डिवाइस शामिल थे, जो अब बेकार हो चुके हैं. इस विफलता के बाद अब इसरो के आगामी कमर्शियल ऑर्डर्स पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं. वहीं, वैज्ञानिकों की टीम अब इस शून्य हुए मिशन के कारणों की तह तक जाने में जुटी है.
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Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
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