Jaipur:'माहौल से मिलता है सेक्युलरिज्म कोई क्रैश कोर्स से नहीं', Jlf में बोले जावेद अख्तर - Secularism Comes From Environment Not From Any Crash Course Javed Akhtar Said In Jlf

Jaipur:'माहौल से मिलता है सेक्युलरिज्म कोई क्रैश कोर्स से नहीं', Jlf में बोले जावेद अख्तर - Secularism Comes From Environment Not From Any Crash Course Javed Akhtar Said In Jlf

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 में बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने अपने सधे हुए लेकिन बेबाक विचारों से श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। ‘जावेद अख्तर: पॉइंट्स ऑफ व्यू’ सत्र में राइटर वरीशा फरासत के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने भाषा, सिनेमा, सेक्युलरिज्म, पढ़ने की आदत और मौजूदा दौर की तकनीक पर खुलकर बात की। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

नाना-नानी से जावेद अख्तर ने सीखी सेक्युलरिज्म 
जावेद अख्तर ने कहा कि सेक्युलरिज्म  कोई क्रैश कोर्स नहीं होता। अगर कोई इसे सिखाने की कोशिश करे तो वह फेक होगा। यह इंसान को अपने आसपास के माहौल से मिलता है। उन्होंने बताया कि उन्हें यह संस्कार अपने नाना-नानी से मिले, जो पढ़े-लिखे नहीं थे लेकिन बेहद उदार और धार्मिक थे। वे अवधी में बात करते थे और पांच वक्त की नमाज़ पढ़ते थे। उसी माहौल में उनकी परवरिश हुई। विज्ञापन विज्ञापन

संस्कृत हजारों साल पुरानी भाषा
भाषाओं को लेकर चलने वाली बहस पर जावेद अख्तर ने दो टूक कहा कि “संस्कृत पहले आई या उर्दू यह सवाल ही गलत है। संस्कृत हजारों साल पुरानी भाषा है, जबकि उर्दू “कल की बच्ची” है। उन्होंने कहा कि तमिल दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषा है और उर्दू उस रेस में ही नहीं है।

पैसे से लोग हो रहे खराब
फिल्म इंडस्ट्री पर बात करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि आज सिनेमा इंडस्ट्री पहले से कहीं ज्यादा मैच्योर और ऑर्गनाइज हो चुकी है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे असिस्टेंट डायरेक्टर थे, तब उन्हें जूते-चप्पल लाने जैसे काम करने पड़ते थे। आज हालात यह हैं कि फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर का नाम एक्टर के बाद लिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले फिल्मों में पैसे की कमी होती थी, आज पैसा इतना आ गया है कि कई लोग उसी से खराब हो जाते हैं।

युवाओं से फिक्शन पढ़ने की अपील
पढ़ने की आदत पर चिंता जताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि व्हाट्सऐप और  चैटजीपीटी ने लोगों को किताबों से दूर कर दिया है। लोग “आर्टिफिशियल जवाब” ढूंढ रहे हैं, जबकि किताबों में जो है, वह कहीं और नहीं मिल सकता। उन्होंने युवाओं से खासतौर पर फिक्शन पढ़ने की अपील की।

दूसरों से तुलना बेकार 
बच्चों को संदेश देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, खुद से करनी चाहिए। दूसरों से तुलना बेकार है, क्योंकि दुनिया में आपसे बेहतर भी होंगे और कमजोर भी। बातचीत के दौरान चश्मा न लगाने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, “अच्छे चेहरे देखें, अच्छी नीयत रखें, चश्मा नहीं लगेगा।”

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सीएम भजनलाल शर्मा ने किया फेस्टिवल का उद्घाटन

इससे पहले होटल क्लार्क्स आमेर में JLF की शुरुआत ‘मॉर्निंग म्यूजिक: नाद बिटवीन साउंड एंड साइलेंस’ से हुई, जिसमें ऐश्वर्या विद्या रघुनाथन ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने आयोजकों के साथ फेस्टिवल का उद्घाटन किया। फेस्टिवल में पांच दिनों तक साहित्य, राजनीति, सिनेमा, तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर गहन मंथन होगा।

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