Kamsundari Devi:कामसुंदरी देवी कौन हैं और क्यों किया था 600 किलो सोना दान? जानिए इतिहास - Who Is Kamsundari Devi Darbhanga Raj Last Queen Biography
विस्तार Follow Us
दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी एक ऐसी शख्सियत थीं, जिनका जीवन सत्ता के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि कर्तव्य की मौन शक्ति से पहचाना गया। 12 जनवरी 2026 को 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। इसी के साथ न केवल एक महारानी चली गईं, बल्कि मिथिला की शाही परंपरा का अंतिम जीवंत अध्याय भी इतिहास बन गया। अपने अंतिम वर्षों में वे भले ही सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं, लेकिन बिहार और देश की सांस्कृतिक स्मृति में उनका स्थान कभी धुंधला नहीं पड़ा। आज जब हम उन्हें केवल एक महारानी के तौर पर नहीं जानते हैं, बल्कि उनके त्याग, दान, जिम्मेदारी, नेतृत्व और मौन राष्ट्रभक्ति के लिए उन्हें याद किया जाता है। आइए जानते हैं दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी के बारे में।
और पढ़ें
Trending Videos
यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
दरभंगा राज की अंतिम महारानी
महारानी कामसुंदरी देवी, स्वर्गीय महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह की पत्नी थीं।
वे ऐसे समय में दरभंगा राजघराने का हिस्सा बनीं, जब राजशाही का सूर्य अस्त हो रहा था और लोकतंत्र की सुबह उग रही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सत्ता में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी, लेकिन उन्होंने परंपरा, मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरे सम्मान के साथ निभाया।
वे मिथिला की उस गौरवशाली संस्कृति की प्रतिनिधि थीं, जहां शिक्षा, दान और लोककल्याण को राजधर्म माना जाता था।
1962 का भारत-चीन युद्ध और 600 किलो सोने का दान
महारानी कामसुंदरी देवी का नाम भारतीय इतिहास में 1962 के भारत-चीन युद्ध के साथ स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। जब देश संसाधनों की भारी कमी और राष्ट्रीय संकट से जूझ रहा था, तब दरभंगा राज की ओर से भारत सरकार को 600 किलोग्राम सोना दान किया गया। यह दान उस दौर में देश के लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि नैतिक संबल भी था।
सादगी, सेवा और त्याग का जीवन
शाही जीवन होने के बावजूद महारानी कामसुंदरी देवी ने सादगी और संयम को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने जीवनभर यह सिद्धांत अपनाया कि जिनके पास अधिक है, उन पर समाज के प्रति अधिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने
शिक्षा के संरक्षण सामाजिक कल्याण मिथिला की सांस्कृतिक विरासत के लिए लगातार कार्य किया।
कल्याणी फाउंडेशन और सांस्कृतिक विरासत
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने दरभंगा राज की
शैक्षणिक बौद्धिक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का कार्य किया।