Lohri 2026: तिल और मूंगफली के बिना अधूरा है लोहड़ी का पर्व, जानिए अग्नि में क्यों डाली जाती है ये चीजें?
Hindi Faith HindiLohri 2026 Why Lohri Is Incomplete Without Sesame Seeds And Peanuts Know Why These Things Are Thrown In The Fire Lohri 2026: तिल और मूंगफली के बिना अधूरा है लोहड़ी का पर्व, जानिए अग्नि में क्यों डाली जाती है ये चीजें?
Lohri 2026: आज यानि 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है जो कि पंजाब व हरियाणा का एक महत्वपूर्ण पर्व है. इस दिन अग्नि जलाकर उसकी परिक्रमा करते समय उसमें तिल व मूंगफली डालने की परंपरा है.
Published: January 13, 2026 7:28 AM IST
By Renu Yadav
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Lohri 2026: लोहड़ी का पर्व पंजाबी व सिख समुदाय का एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. लोहड़ी के मौके पर शाम के समय खुले आसमान के नीचे अग्नि जलाई जाती है और फिर परिवार, दोस्त, रिश्तेदार मिलकर परिक्रमा लगाते हैं. लोहड़ी पर अग्नि की परिक्रमा लगाते समय उसमें तिल व मूंगफल डाले जाते हैं. साथ ही अग्नि के चारों ओर ढोल, नागड़े, गिद्दे और लोकगीत गाए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते है कि लोहड़ी के दिन आग में तिल और मूंगफली क्यों डाले जाते हैं? आइए जानते हैं कि इसके पीछे छिपे महत्व के बारे में.
लोहड़ी पर तिल और मूंगफली का महत्व
लोहड़ी का पर्व फसल की कटाई और नई फसल की बुआई का प्रतीक है. इस दौरान फसल में उगा थोड़ा सा अन्न भी अग्नि में अर्पित किया जाता है. लोहड़ी में अन्न अर्पित करते समय लोग भगवान से अच्छी फसल की कामना करते हैं और सालभर खेती में बरकत की प्रार्थना करते हैं. इस दिन अग्नि देव का पूजन किया जाता है और उनको अच्छी फसल के प्रति आभार प्रकट किया जाता है. इसके साथ ही लोहड़ी के दिन अग्नि में तिल व मूंगफली भी डाले जाते हैं और इसका सर्दियों के मौसम से गहरा नाता है.
लोहड़ी का पर्व ऋतु परिवर्तन का भी पर्व है और इसके अगले दिन मकर संक्रांति आती है. इसके बाद दिन बड़े और राते छोटी होने लगती हैं. यानि सर्दियां जाने लगती है और मौसम में बदलाव होता है. सर्दी के मौसम में तिल व मूंगफली का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है और लोहड़ी के दिन अग्नि में तिल व मूंगफली इसलिए डाले जाते हैं ताकि जाती हुई सर्दी में तिल व मूंगफली का सेवन करें और स्वस्थ्य रहें.
भगवान श्रीकृष्ण से भी लोहड़ी का गहरा रिश्ता
पौराणिक कथाओं के अनुसार लोहड़ी का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी है. श्रीकृष्ण को मारने के लिए उनके मामा कंस ने लोहिता राक्षसी को नंदगांव भेजा था. जब लोहिता नंदगांव में पहुंची तो वहां सभी लोग मिलकर मकर संक्रांति का पर्व मना रहे थे. ऐसे में मौके का फायदा
उठाकर लोहिता राक्षसी ने श्री कृष्ण को मारने की कोशिश की लेकिन वह इसमें असफल हो गई. इसके बाद श्री कृष्ण ने उसका वध कर दिया. जब लोगों को लोहिता के वध के बारे में पता चला तो मकर संक्रांति से 1 दिन पहले लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाने लगा.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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Renu Yadav
रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों ... और पढ़ें
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