Lucknow:बैंक ऑफ इंडिया के कर्मियों पर वन विभाग के 64.82 करोड़ के घोटाले का आरोप...खोला फर्जी खाता - Lucknow: Bank Of India Employees Accused Of A Rs 64.82 Crore Scam Involving The Forest Department; Fake Accoun
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वन निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने बैंक ऑफ इंडिया सदर शाखा के कर्मियों पर विभाग के 64 करोड़ 82 लाख 21 हजार रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया है। आरोपियों पर यह रकम फर्जी खाता खोलकर उसमें ट्रांसफर करने का आरोप है। घोटाले की जानकारी होने पर सोमवार को प्रबंध निदेशक ने गाजीपुर थाने में बैंक कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
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गाजीपुर स्थित अरण्य विकास भवन में प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार बैठते हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग के 64.82 करोड़ रुपये की एफडी बैंक ऑफ महाराष्ट्र में थी, जो मैच्योर हो गई थी। समय पूरा होने पर विभाग अन्य बैंकों में रकम की एफडी करना चाहता था।
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इस सिलसिले में विभाग ने 29 दिसंबर 2025 को ई मेल के जरिये बैंकों के लिए निविदा निकाली थी। 30 दिसंबर को 10:30 बजे से शाम 3:45 तक बैंकों को निविदा प्रस्तुत करनी थी।
तय समय पर वन विभाग की गठित कमेटी के सामने निविदा खोली गई तो अन्य बैंकों के मुकाबले बैंक आफ इंडिया की सदर शाखा की एफडी पर ब्याज दर (6.73) सबसे अधिक थी। चयन होने पर गोमतीनगर के विक्रांत खंड स्थित एचडीएफसी बैंक के शाखा प्रबंधक को 31 दिसंबर को विभाग की रकम बीओआई को ट्रांसफर करने के लिए निर्देशित किया गया था।
रकम ट्रांसफर न होने पर घटा दी ब्याज दर
प्रबंध निदेशक ने बताया कि किसी कारणवश जब 64.82 करोड़ रुपये बीओआई को ट्रांसफर नहीं हुए तो बैंक ने एक जनवरी 2026 को वन विभाग को मेल किया। मेल के जरिये बैंक ने नए वर्ष का हवाला देते हुए कहा कि पहले तय हुई एफडी के ब्याज दर 6.73 से घटा कर 6.70 कर दी गई है। इस पर भी विभाग राजी हो गया। फिर पांच जनवरी को विभाग में सहायक लेखाकार राजकुमार गौतम ने एफडी के लिए बैंक से संपर्क किया।
बैंक से मेल आने पर खुला घोटाला
अरविंद का कहना है कि अगले दिन वन विभाग कार्यालय में बीओआई का एक लेटर आया। लेटर बैंक ने 22 दिसंबर को स्पीड पोस्ट किया था। लेटर में लिखा था था कि बैंक में 22 दिसंबर को उत्तर प्रदेश फॉरेस्ट कॉरपोरेशन के नाम पर बचत खाता खोला गया है। खाते में जमा 64.82 करोड़ रुपये में से सिर्फ 6.82 करोड़ रुपये की एफडी की गई है, जो 12 महीने पर मैच्योर हो जाएगी।
बैंक ने यह भी कहा कि यह खाता वन विभाग के कर्मचारी के कहने पर खोला गया है। इसकी जानकारी मिलते ही प्रबंध निदेशक अरविंद दंग रह गए। उनका कहना था कि बैंक ने जिस कर्मी की जानकारी दी वह विभाग में कार्यरत ही नहीं था। अरविंद ने अगले दिन बैंक से जब पूरी रकम की रसीद मांगी तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। विभाग की जांच पूरी होने पर प्रबंध निदेशक ने बैंक के कर्मियों पर सरकारी धन का घोटाला करने का आरोप लगाते हुए गाजीपुर थाने में शिकायत की।
एसीपी ने की ये बात...
गाजीपुर के एसीपी ए. विक्रम सिंह ने बताया कि वन निगम के प्रबंधक निदेशक ने थाने में तहरीर दी है। जांच के लिए पुलिस की दो टीमें गठित की गई हैं। एक टीम ने प्रबंध निदेशक से मामले से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। जबकि दूसरी टीम बैंक कर्मियों से भी संपर्क कर रही है। बैंक में जमा रकम और स्टेटमेंट की जांच की जा रही है। तफ्तीश में जो भी साक्ष्य मिलेंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।