Mahadev Blessings Upay:प्रदोष पर मासिक शिवरात्रि का व्रत, महादेव की कृपा के लिए अवश्य करें ये काम - Masik Shivratri And Pradosh Vrat On 16 January 2026 Know Shubh Muhurat And Upay For Mahadev Blessings
{"_id":"6968cc5199e66a746808755a","slug":"masik-shivratri-and-pradosh-vrat-on-16-january-2026-know-shubh-muhurat-and-upay-for-mahadev-blessings-2026-01-15","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Mahadev Blessings Upay: प्रदोष पर मासिक शिवरात्रि का व्रत, महादेव की कृपा के लिए अवश्य करें ये काम","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}} Mahadev Blessings Upay: प्रदोष पर मासिक शिवरात्रि का व्रत, महादेव की कृपा के लिए अवश्य करें ये काम धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Thu, 15 Jan 2026 04:57 PM IST सार
Masik Shivratri And Pradosh Vrat On 16 January 2026: 16 जनवरी को प्रदोष और मासिक शिवरात्रि दोनों का विशेष संयोग बना हुआ है। इसमें महादेव की पूजा और कुछ उपाय करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
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Masik Shivratri And Pradosh Vrat On 16 January 2026: 16 जनवरी 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इस पावन तिथि पर भगवान महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार, जब प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन पड़ते हैं, तो उसका पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि, इस दुर्लभ संयोग में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति के कष्ट, रोग, भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन मूल नक्षत्र और ध्रुव योग का शुभ प्रभाव बना रहेगा। ऐसे में कुछ सरल उपाय करने से व्यक्ति के जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं। आइए इन्हें जानते हैं।
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अवश्य करें ये काम
आप इस दिन गेहूं और धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक करें।
महादेव को 11 बेलपत्र भी अर्पित करें। यह बेहद शुभ होता है।
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महादेव को शहद और कच्चे चावल अर्पित करें। इसके प्रभाव से धन लाभ होता है।
शिव जी को दूध चढ़ाएं। इस दौरान शिव चालीसा का पाठ भी करें। इससे मनचाहा साथी पाने की कामना पूरी होती हैं।
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इस दिन आप 3 मुखी रुद्राक्ष की पूजा करें और उस रुद्राक्ष को गले में धारण कर लें। इससे सभी कष्टों का निवारण होने लगता है।
इस दुर्लभ संयोग पर आप शिव जी के 108 नामों का जाप करें।
बेलपत्र लें और उन पर चंदन से ॐ लिखें। इसे महादेव को चढ़ाएं।
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महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
शिव चालीसा पाठ
।।दोहा।।
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नंदि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहं करी सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शंभु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमंत ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
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