Makar Sankranti:मकर संक्रांति पर तत्तापानी में हजारों ने लगाई आस्था की डुबकी, तुलादान भी किया, देखें वीडियो - Makar Sankranti: Thousands Took A Holy Dip In Tattapanani And Also Donated Their Weights.
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हिमाचल प्रदेश के शिमला और मंडी जिला की सीमा पर स्थित तत्तापानी में मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान बुधवार सुबह 4:00 बजे से शुरू हुआ। इस दौरान शिमला समेत विभिन्न जिलों से हजारों लोगों ने तत्तापानी में बने गर्म पानी के स्रोतों में पवित्र स्नान किया। ग्रह शांति के लिए लोगों ने तुलादान भी किया। राजधानी समेत विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए एचआरटीसी के लोकल और ग्रामीण डिपो ने अतिरिक्त बसें चलाने का फैसला लिया है। निगम प्रबंधन के मुताबिक लोगों की भीड़ को देखते हुए और बसें भी चलाई गईं। इसके अलावा सुन्नी में यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए शिमला से अतिरिक्त पुलिस जवानों को तैनात किया गया। वाहनों की अधिक संख्या होने पर सुन्नी से पहले घरयाणा में ही वाहनों को खड़ा करने की सुविधा प्रदान की गई।
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मेला समिति ने तत्तापानी में किया कन्या पूजन का आयोजन
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर मेला समिति की ओर से कन्या पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में एसडीएम करसोग गौरव महाजन ने विधिवत रूप से 21 कन्याओं का पूजन किया। कन्या पूजन कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की गई तथा उन्हें प्रसाद एवं भेंट प्रदान की गई। एसडीएम गौरव महाजन ने इस अवसर पर कहा कि कन्या पूजन हमारी सनातन संस्कृति की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो नारी शक्ति के सम्मान और समाज में सकारात्मक मूल्यों को स्थापित करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। एसडीएम ने कहा कि तत्तापानी मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। तत्तापानी मेला क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसमें प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।कार्यक्रम में मेला समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान के साथ खिचड़ी का लगा भोग
छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी जिले में मकर संक्रांति का त्योहार बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सूर्य देव के उत्तरायण होने की स्थिति में माघ की प्रथम तिथि को मकर सक्रांति का यह त्योहार हर वर्ष मनाया जाता है। मंडी जिला के ततापानी में गर्म पानी के चश्मों में लोगों ने पवित्र स्नान करे देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही लोगों ने दान भी किया। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। आचार्य दिनेश शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान छह महीनों के लिए जागृत होते हैं, इसलिए हिंदू धर्म में इस दिन को विशेष माना गया है। उन्होंने बताया कि इस बार मकर सक्रांति पर षटतिला एकादशी का भी शुभ संयोग बना, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। वहीं, इस दिन जिले भर में उड़द की दाल की खिचड़ी बनाने की प्राचीन परंपरा भी चली आ रही है। लोगों ने सुबह अपने घर पर खिचड़ी, देशी घी, दूध, दही और गुड़ के साथ इसका भोग देवी-देवताओं को लगाने के बाद खुद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा और कमलदेव चौहान ने बताया कि मकर सक्रांति को वे माघ साजे के रूप में मनाते हैं। इसे एक तरह से ऋतु परिवर्तन का त्योहार माना जाता। इसके बाद धीरे-धीरे सर्दी की समाप्ति और गर्मियों की शुरुआत होती है। लेकिन इस बार मकर संक्रांति तक बारिश न होने की चिंता भी लोगों में स्पष्ट रूप से नजर आई और उन्होंने जल्द बारिश होने की कामना भी की।
मान्यता है कि तत्तापानी महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली रही है। ऐसे में लोगों की तत्तापानी में मकर संक्रांति के पावन पर्व को लेकर गहरी आस्था है। स्थानीय पंडित भक्ति प्रकाश ने बताया कि लोग नवग्रह की शांति के लिए तुलादान करवाने आते हैं। यहां पर गर्म पानी के चश्मे थे। लोग सतलुज किनारे स्नान करते थे। अब गर्म पानी के चश्मे कोल बांध परियोजना में डूब गए हैं। स्नान करने के लिए सतलुज किनारे व्यवस्था की गई है।
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