Mark Tully Death: कौन थे मार्क टली, अयोध्या में कारसेवकों की भीड़ ने बनाया था बंदी; इसके बाद भी नहीं छोड़ी पत्रकारिता
Hindi India HindiWho Was Mark Tully Indian British Journalist Death Captured By Kar Sevaks In Ayodhya In 1992 Mark Tully Death: कौन थे मार्क टली, अयोध्या में कारसेवकों की भीड़ ने बनाया था बंदी; इसके बाद भी नहीं छोड़ी पत्रकारिता
Mark Tully Death: ब्रिटिश पत्रकार मार्क टली भारत की राजनीति, संस्कृति और समाज को गहराई से समझने वाले विदेशी पत्रकारों में सबसे भरोसेमंद माने जाते थे, 90 साल की उम्र में दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. आज हम आपको उनका अयोध्या से जुड़ा एक किस्सा बताएंगे.
Published: January 25, 2026 6:35 PM IST
By Tanuja Joshi
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Who Was Mark Tully: ब्रिटिश पत्रकार Mark Tully का जीवन भारत के साथ एक जटिल और लंबा रिश्ता रहा. उनका जन्म 1935 में कोलकाता के टॉलीगंज में हुआ था. बचपन में उन्हें ब्रिटिश परिवार की सुरक्षित दुनिया में रखा गया और स्थानीय भारतीय समाज के संपर्क से दूर रखा गया. उन्हें यह भी कहा गया कि हिंदी सीखना उनके लिए सही नहीं है, लेकिन भारत ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला. 9 साल की उम्र में जब उन्हें इंग्लैंड भेजा गया, तो उन्होंने पाया कि वहां का जीवन भारत की रंगीन और गर्म वातावरण की तुलना में सूना और अकेला है.
अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के चरम पर पहुंचते ही उत्तर प्रदेश देश-विदेश की मीडिया का केंद्र बन गया. उसी दौर में मार्क टली ने औपचारिक रूप से मुझे बीबीसी नेटवर्क से जोड़ा और हम दोनों ने 6 दिसंबर 1992 की ऐतिहासिक और संवेदनशील घटना को साथ-साथ कवर किया. उस दिन सिर्फ मस्जिद के ढहने की खबर ही नहीं, बल्कि दो दिन बाद पुलिस-प्रशासन की तरफ से विवादित स्थल पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किए जाने की सूचना भी सबसे पहले हमारी रिपोर्टिंग से सामने आई. तकनीकी संसाधनों की कमी, मोबाइल फोन के अभाव और संचार लाइनों के काट दिए जाने के बावजूद खबर पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी. कारसेवकों से बचते हुए ग्रामीण रास्तों से होकर केंद्रीय तारघर तक पहुँचना और वहां से खबर भेजना उस समय जोखिम भरा लेकिन जरूरी कदम था.
बंधक बनाए गए था मार्क टली
मस्जिद विध्वंस के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया था कि विदेशी पत्रकारों, खासकर गोरे संवाददाताओं को निशाना बनाया जा रहा था. इसी बीच जब कारसेवकों का एक समूह और अधिक उग्र हो गया, तो मार्क टली और कुछ अन्य पत्रकार दशरथ महल के पास घेर लिए गए और कुछ समय के लिए बंधक जैसी स्थिति बन गई. हालात बेहद नाजुक थे, लेकिन सौभाग्य से दशरथ महल के महंत ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली और पत्रकारों को सुरक्षित निकलने में मदद की. यह घटना न सिर्फ उस दौर की अस्थिरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मार्क टली किस साहस और प्रतिबद्धता के साथ भारत की सबसे कठिन कहानियों को सामने लाने में जुटे रहे.
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Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
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