Mauni Amavasya 2026 :घना कोहरा और कड़क सर्दी, फिर भी संगम पर मौन का जनसमुद्र - Mauni Amavasya 2026: Dense Fog And Bitter Cold, Yet A Sea Of Silence Gathers At The Confluence

Mauni Amavasya 2026 :घना कोहरा और कड़क सर्दी, फिर भी संगम पर मौन का जनसमुद्र - Mauni Amavasya 2026: Dense Fog And Bitter Cold, Yet A Sea Of Silence Gathers At The Confluence

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संगम की रेती पर माघ मेले के तीसरे मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस्या के मौके पर रविवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी संगम तट पर मौन का जनसमुद्र उमड़ पड़ा। घने कोहरे व कड़ाके की सर्दी के बावजूद ब्रह्म मुहूर्त से ही साधु-संतों के साथ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते रहे। दिन में धूप खिली तो करीब 11 बजे हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई।

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संगम सहित 24 घाटों पर शनिवार से शुरू हुए स्नान का क्रम रविवार तक चलता रहा। कोहरा छंटने के साथ भीड़ बढ़ती गई। श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ संगम नोज, दशाश्वामेध घाट, राम घाट, काली घाट, कल्पवासी घाट के साथ अरैल, झूंसी और फाफामऊ घाटों पर रही। शाम चार बजे तक 3.80 करोड़ लोग संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। प्रशासन ने अनुमान जताया कि यह आंकड़ा पांच करोड़ के पार जाएगा। विज्ञापन विज्ञापन

वहीं, एक दिन पहले शनिवार को ही डेढ़ करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके थे। वहीं, मौनी अमावस्या पर संगम नोज पर स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। इस दौरान जिले के आला अफसर भ्रमणशील रहे। इसमें कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेला अधिकारी ऋषिराज, आईजी पीएसी अतुल शर्मा, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, अपर पुलिस कमिश्नर डॉ. अजय पाल शर्मा, एसपी मेला नीरज पांडेय सहित अन्य अफसर शामिल रहे।

Mauni Amavasya 2026: Dense fog and bitter cold, yet a sea of silence gathers at the confluence

माघ मेले में मौनी अमावस्या पर संगम तट विहंगम दृश्य। - फोटो : अमर उजाला। योगी बाबा फूल बरसावत हुएय....

मौनी अमावस्या पर जिस समय हेलिकॉप्टर से फूल बरसाने का क्रम शुरू हुआ तो घाटों पर खड़े श्रद्धालु ही नहीं मेले की ओर बढ़ रहे लोगों की निगाहें भी आसमान की ओर टिक गईं। श्रद्धालु गदगद दिखे। इस बीच अपने बेटे से बिछड़ी कोरांव की बुजुर्ग महिला रन्नो देवी बोल पड़ीं... देखत है बबुआ...योगी बाबा फूल बरसावत हुएय...।

स्नान-दान का है विशेष महत्व

माघ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या भी कहते हैं। ज्योतिषियों और तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर त्रिवेणी में स्नान और दान करना कई गुना अधिक फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने से श्रद्धालुओं के शरीर के साथ ही आंतरिक काया का भी शुद्धिकरण होता है। मौनी अमावस्या का पर्व तप योग का पर्व है। मौनी अमावस्या के दिन परिक्रमा, पूजन, स्नान, दान, तप और योग का विधान है। इस बार रविवार को मौनी अमावस्या पड़ने की वजह से इसका महत्व काफी बढ़ गया है।

Mauni Amavasya 2026: Dense fog and bitter cold, yet a sea of silence gathers at the confluence

माघ मेले में मौनी अमावस्या पर संगम तट विहंगम दृश्य। - फोटो : अमर उजाला। किए गए सुरक्षा के खास प्रबंध

800 हेक्टेयर और सात सेक्टर में बसाए गए माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व को लेकर मेला प्रशासन की ओर से खास इंतजाम किए गए। मेला क्षेत्र की सुरक्षा में 10 हजार पुलिस, पीएसी, आरएएफ, सिविल ड्रेस में इंटेलिजेंस और एलआईयू के जवान तैनात किए गए हैं। वहीं, स्नान घाटों पर डीप वाटर बैरिकेडिंग, जल पुलिस और गोताखोर लगाए गए हैं। जिले के आला अधिकारी भी लगातार मेला क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं।

माघ मेले की निगरानी 400 से ज्यादा सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी की जा रही है। एआई युक्त कैमरे भी संचालित हैं। मेला क्षेत्र में एटीएस, आरएएफ, बीडीएस और खुफिया एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है। मेले में आने वाली भीड़ की आईट्रिपलसी में बनाए गए कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की जा रही है। मेले में आए श्रद्धालुओं की सकुशल घर वापसी के लिए रेलवे और परिवहन निगम के साथ बेहतर समन्वय कर बसों और स्पेशल ट्रेनों का भी इंतजाम किया गया है।

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