Message On Awakening The Inner Spring - Hisar News

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हिसार। सिरसा रोड स्थित ओशो ध्यान उपवन में ‘ध्यान जीवन का वसंत’ विषय पर विशेष ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में स्वामी संजय एवं मां सांची ने साधकों को वसंत के वास्तविक अर्थ से परिचित कराते हुए जीवन को उल्लासमय, आनंदमय और उत्सवपूर्ण बनाने के उपाय बताए। ध्यान विधियों के अभ्यास के माध्यम से साधकों को आंतरिक शांति, वसंत और जागरूकता की अनुभूति कराई गई। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
स्वामी संजय ने कहा कि जब बाहर पक्षी चहचहाते हैं, फूल खिलते हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है, तो वातावरण उत्सव जैसा प्रतीत होता है। जब मनुष्य ध्यान के माध्यम से अपने भीतर गहराई में उतरता है, तो उसे भी वैसा ही अद्भुत आंतरिक उत्सव अनुभव होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी वसंत ऋतु के साथ आता-जाता है लेकिन यदि वसंत मनुष्य के भीतर जागृत हो जाए तो वह शाश्वत हो जाता है। विज्ञापन विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वसंत केवल बाहर दिखाई देने वाला मौसम नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक अवस्था है। ध्यान और उत्सव के भाव से हर क्षण वसंत को जिया जा सकता है। स्वामी संजय ने बताया कि सतगुरु ओशो ने जीवन के असली वसंत पर अनेक व्याख्यान दिए हैं। स्वामी संजय ने ओशो के विचारों को साझा करते हुए कहा कि जैसे बाहर वसंत और पतझड़ आते हैं, वैसे ही मनुष्य के भीतर भी वसंत और पतझड़ होते हैं।

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