Most Of The Medicines Started Being Available From Hrf - Lucknow News

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के काउंटर पर शुक्रवार को माहौल आम दिनों से अलग नजर आया। सामान्य दिनों में मरीजों को डॉक्टरों की लिखीं इक्का-दुक्का दवाएं ही मिलती थीं। अमर उजाला में इसकी खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार मरीजों को ज्यादातर दवाएं मिल रहीं थीं। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

केजीएमयू के एचआरएफ काउंटर के माध्यम से रोगियों को 70 फीसदी तक कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद कुछ डॉक्टर फॉर्मा कंपनियों की कमीशनबाजी के चक्कर में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखते हैं। इतना ही नहीं मरीजों को बाकायदा मेडिकल स्टोर का पता बताया जाता है। अमर उजाला ने बुधवार और बृहस्पतिवार को इसकी खबर प्रकाशित की। इसका असर यह हुआ कि ज्यादातर मरीजों को ऐसी दवाएं लिखीं गईं जो एचआरएफ में उपलब्ध थीं। विज्ञापन विज्ञापन
केस 1-
सीतापुर की सिधौली निवासी किरण और आलमबाग निवासी पूजा रावत ने न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाया था। दोनों को चार-चार दवाएं लिखीं गईं। इनमें से दोनों को तीन-तीन दवाएं एचआरएफ के माध्यम से मिल गईं।
केस 2-
कन्नौज निवासी शबीना बेगम और सिद्धार्थनगर सद्दाम हुसैन ने गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग में दिखाया था। डॉक्टर ने शबीना बेगम को चार और सद्दाम हुसैन को दो दवाएं लिखीं। इनको सभी दवाएं मिल गईं।
केस 3-
खदरा निवासी लियाकत अली ने रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में दिखाया था। डॉक्टर ने उनको छह दवाएं लिखीं और ये सभी एचआरएफ काउंटर से मिल गईं।
स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत



केजीएमयू में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सिर्फ एचआरएफ काउंटर पर दवाएं उपलब्ध कराना ही जरूरी नहीं हैं। इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था बनाने की भी जरूरत है, जिससे सभी को ये दवाएं मिल भी सकें। अभी तक केजीएमयू प्रशासन इसकी व्यवस्था नहीं कर सका है।

मरीजों को मिलीं दवाएं।

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