Mp News:भोपाल डिक्लेरेशन-2 की प्रक्रिया शुरू,दिग्विजय बोले-अब युवाओं से संवाद जरूरी, Sc-st वर्ग पर अत्याचार - Mp News: The Process For The Bhopal Declaration-2 Has Begun; Digvijay Singh Says Dialogue With Youth Is Now Es

Mp News:भोपाल डिक्लेरेशन-2 की प्रक्रिया शुरू,दिग्विजय बोले-अब युवाओं से संवाद जरूरी, Sc-st वर्ग पर अत्याचार - Mp News: The Process For The Bhopal Declaration-2 Has Begun; Digvijay Singh Says Dialogue With Youth Is Now Es

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पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने सोमवार को राजधानी भोपाल में भोपाल डिक्लेरेशन-2 के ड्राफ्टिंग सत्र की शुरुआत की। यह पहल भोपाल डिक्लेरेशन-1 की 25वीं वर्षगांठ से पहले की गई और इसका उद्देश्य SC-ST वर्ग के अधिकारों, रोजगार, भूमि, शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े एजेंडे को नए संदर्भ में तैयार करना है। दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता में पुराने अनुभवों, सामाजिक बदलावों और प्रशासनिक विफलताओं पर खुलकर बात रखी। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

अनुसूचित जाति, जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे प्रसन्नता
उन्होंने साफ कहा कि यह दस्तावेज सिर्फ अतीत की पुनरावृत्ति नहीं होगा, बल्कि वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस सरकार बनने पर आदिवासी या एससी से  मुख्यमंत्री बनाए जाने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे प्रसन्नता होगी। विज्ञापन विज्ञापन

मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि पहले का भोपाल डिक्लेरेशन किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति-दोनों के हितों को शामिल किया गया था। इमरजेंसी के बाद के दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय एससी-एसटी वर्ग के लोगों को गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और स्वरोजगार के अवसर देकर मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की गई थी।उन्होंने कहा कि आज सामाजिक संरचना बदल चुकी है। 2000 के बाद जन्मी पीढ़ी यानी जेन-जी की सोच, अपेक्षाएं और सवाल अलग हैं। ऐसे में उनसे संवाद किए बिना कोई भी नीति प्रभावी नहीं हो सकती। इसी कारण भोपाल डिक्लेरेशन–2 में युवा नीति, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर नए सिरे से मंथन किया जा रहा है।

पुरानी नीतियों की समीक्षा, सिस्टम की चूक पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने 2002-03 के फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि उस दौर में शासकीय खरीद में आरक्षण दिया गया था और डिप्लोमा-डिग्रीधारी युवाओं को बिना टेंडर काम देने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई योजनाओं का लाभ जमीन पर पूरी तरह नहीं पहुंच पाया।उन्होंने कहा कि सरकारी जमीनों पर दबंगों के कब्जे और प्रशासनिक बाधाएं बड़ी समस्या रहीं। गरीबों को पट्टे तो दिए गए, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद बड़ी संख्या में ये पट्टे निरस्त कर दिए गए। बाद में उन्हें वापस दिलाने के लिए अभियान चलाना पड़ा। इन अनुभवों से सीख लेते हुए भोपाल डिक्लेरेशन-2 में क्रियान्वयन को सबसे अहम मुद्दा बनाया जा रहा है।

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सुझावों के लिए खुलेगा मंच
भोपाल डिक्लेरेशन-2 के मसौदे पर सुझाव लेने के लिए एक बड़ी बैठक प्रस्तावित है। इसमें विभिन्न वर्गों, प्रदेशों और जनप्रतिनिधियों से राय ली जाएगी। संविधान और लोकतंत्र जैसे मूल विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। सभी सुझावों के बाद ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर इसे 13 जनवरी 2027 को राष्ट्रीय स्तर पर जारी किया जाएगा।

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दलित एजेंडे पर आत्मालोचना
पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने पुराने दलित एजेंडे को लेकर आत्मालोचना करते हुए कहा कि उस समय नीयत सही थी, लेकिन अमल अधूरा रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील और प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ियों के कारण कई जरूरतमंदों को अब तक जमीन का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। अधिकारियों की भूमिका ने पूरी योजना को कमजोर किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं चूकों से सबक लेते हुए अब नए दस्तावेज में सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता पर खास जोर दिया जाएगा। कुल मिलाकर, भोपाल डिक्लेरेशन-2 के जरिए बीते फैसलों की समीक्षा, एससी-एसटी वर्ग के साथ हो रहे अन्याय, प्रशासनिक विफलताओं और जेन-जी की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए एक नए सियासी और सामाजिक विमर्श की रूपरेखा तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें दिग्विजय सिंह समेत वरिष्ठ नेताओं के अनुभव निर्णायक भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।

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