Mp News:जहरीले पानी पर Ngt सख्त,पूरे प्रदेश में निगरानी और सुधार के आदेश,शहरों की जल आपूर्ति जांच के घेरे में - Mp News: Ngt Takes Strict Action On Contaminated Water, Orders Monitoring And Improvement Across The State, Ci
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मध्यप्रदेश में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारियों और मौतों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। इंदौर और प्रदेश के अन्य शहरों में सप्लाई हो रहे पानी में फीकल कोलिफॉर्म, ई-कोलाई और खतरनाक बैक्टीरिया पाए जाने को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संकट मानते हुए ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार और सभी नगर निगमों को व्यापक निर्देश जारी किए हैं। NGT ने स्पष्ट कहा है कि यह समस्या केवल इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सतना और अन्य शहरों में भी पेयजल व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आई हैं। ट्रिब्यूनल ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत स्वच्छ पेयजल के अधिकार का उल्लंघन माना है। यह आदेश याचिकाकर्ता राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, इंदौर एवं अन्य मामले में पारित किया गया।
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इंदौर में पानी से मौतें, सिस्टम फेल होने की पुष्टि
NGT के समक्ष प्रस्तुत याचिकाओं में बताया गया कि दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में अत्यधिक दूषित पानी की आपूर्ति के कारण बड़े पैमाने पर लोग बीमार पड़े, कई को ICU में भर्ती करना पड़ा और मौतें भी हुईं। लैब रिपोर्ट में पानी में वाइब्रियो कॉलरी, फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई की पुष्टि हुई, जिससे सीवेज के पानी के पेयजल पाइपलाइन में मिलने की बात सामने आई ।
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NGT ने राज्य सरकार और सभी नगर निगमों को दिए निर्देश
- पेयजल की 24×7 मॉनिटरिंग के लिए वाटर ऐप विकसित किया जाए
- जल पाइपलाइनों और सीवेज नेटवर्क की GIS मैपिंग की जाए
- ओवरहेड टैंकों और सम्पवेल्स की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन हो
- दूषित जल आपूर्ति पर तुरंत जनसूचना और अलर्ट सिस्टम लागू किया जाए
- अवैध कब्जे हटाए जाएं और जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- पानी की गुणवत्ता की जानकारी बिल और मीडिया के जरिए जनता को दी जाए ।
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जांच के लिए हाई लेवल जॉइंट कमेटी गठित
ट्रिब्यूनल ने IIT इंदौर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित की है। समिति को छह सप्ताह में साइट निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य PCB को नोडल एजेंसी बनाया गया है।