Nhai:दिल्ली में हाईवे बने, लेकिन पेड़ क्यों नहीं बढ़े? एनएचएआई ने बड़े पैमाने पर इन कमियों की ओर किया इशारा - Highways Built, Trees Missing: Nhai Flags Afforestation Shortfall In Delhi Projects

Nhai:दिल्ली में हाईवे बने, लेकिन पेड़ क्यों नहीं बढ़े? एनएचएआई ने बड़े पैमाने पर इन कमियों की ओर किया इशारा - Highways Built, Trees Missing: Nhai Flags Afforestation Shortfall In Delhi Projects

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दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ वर्षों से यह वादा किया जाता रहा है कि काटे गए पेड़ों के बदले नई पौधरोपण (कम्पनसेटरी अफॉरेस्टेशन) की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में दो बड़े प्रोजेक्ट UER-2 और द्वारका एक्सप्रेसवे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

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कितने पेड़ लगाने थे और पैसा कितना दिया गया था?

इन दोनों परियोजनाओं के लिए पेड़ लगाने की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को दी गई थी। UER-2 के लिए 64,080 पेड़ लगाने थे, जिसके लिए 55.1 करोड़ रुपये जमा किए गए द्वारका एक्सप्रेसवे के लिए 1,53,990 पेड़ लगाने थे, जिसके बदले 87.77 करोड़ रुपये डीडीए को दिए गए इसके बावजूद, NHAI का कहना है कि एक लाख से ज्यादा पेड़ों का काम अब भी अधूरा है।

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UER-2 प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी सामने आई?
अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) जिसे दिल्ली की तीसरी रिंग रोड कहा जा रहा है, का उद्घाटन अगस्त 2025 में हुआ था। यह सड़क उत्तर दिल्ली से शुरू होकर रोहिणी, बवाना, मुंडका, नजफगढ़ होते हुए आईजीआई एयरपोर्ट के पास NH-48 तक जाती है।

NHAI की रिपोर्ट के अनुसार: 2021 में डीडीए को 64,080 पेड़ों के लिए 55.10 करोड़ रुपये दिए गए डीडीए ने दावा किया कि 57,280 पेड़ लगाए जा चुके हैं लेकिन साइट निरीक्षण में सिर्फ 24,887 पेड़ ही मौजूद पाए गए यह मामला फरवरी 2025 में मुख्य सचिव स्तर तक और फिर जून 2025 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री की बैठक में भी उठाया गया था। डीडीए ने मानसून 2025 में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।

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Dwarka Expressway - फोटो : PTI द्वारका एक्सप्रेसवे में स्थिति क्यों चिंताजनक है?
29 किलोमीटर लंबा द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली और गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट, 1994 के अनुसार बड़े पैमाने पर पौधरोपण अनिवार्य था।

एनएचएआई के मुताबिक: डीडीए ने अगस्त 2024 में दावा किया कि 1,51,452 पेड़ लगाए गए हैं लेकिन संयुक्त साइट निरीक्षण में करीब आधे पेड़ ही मौजूद मिले यह मुद्दा भी फरवरी 2025 में मुख्य सचिव और दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर उठाया गया  जिसके बाद डीडीए को काम तेज करने के निर्देश दिए गए।
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DDA ने अपनी सफाई में क्या कहा था?
दस्तावेजों के अनुसार, डीडीए ने पहले दावा किया था कि UER-2 के लिए पौधरोपण: कुसुमपुर पहाड़ी तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क में किया गया।

डीडीए ने यह भी कहा कि कालिंदी पार्क में पौधरोपण नष्ट हो गया था, इसलिए प्रोजेक्ट को तुगलकाबाद शिफ्ट किया गया, जहां काम पूरा हो चुका है। हालांकि, इस पूरे मामले पर डीडीए की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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पर्यावरण विशेषज्ञ इस स्थिति को कैसे देखते हैं?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन कंधारी का कहना है कि कागजों पर लगाए गए पेड़ों और जमीन पर मौजूद पेड़ों के बीच का अंतर सिस्टम की गहरी विफलता को दिखाता है।
उनके मुताबिक: सिर्फ रिपोर्ट भर देना पर्याप्त नहीं है जरूरत है प्रशिक्षित स्टाफ सही उपकरण स्पष्ट प्रक्रियाएं और लगातार निगरानी की हालांकि CAMPA जैसे ढांचे थर्ड-पार्टी जांच और निरीक्षण की बात करते हैं। लेकिन जमीनी टीमों के पास न तो पर्याप्त संसाधन होते हैं और न ही जियो-टैगिंग और डिजिटल रिपोर्टिंग जैसे आधुनिक टूल्स।

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आगे का रास्ता क्या होना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में कम्पनसेटरी अफॉरेस्टेशन को सिर्फ औपचारिकता न मानकर, स्टाफिंग तकनीकी प्रशिक्षण और समर्पित मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है।

तभी यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दिल्ली में विकास के साथ-साथ हरियाली भी वास्तव में जमीन पर दिखाई दे, सिर्फ फाइलों में नहीं।

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