Nhai:राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं से हादसे रोकने की नई पहल, एनएचएआई ने शुरू किया रियल-टाइम अलर्ट पायलट - Nhai Launches Real-time Stray Cattle Safety Alert Pilot On National Highways For Road Safety
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर अचानक सामने आ जाने वाले आवारा पशुओं की वजह से होने वाले सड़क हादसों को कम करने के लिए रियल-टाइम सेफ्टी अलर्ट सिस्टम का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत ड्राइवरों को पहले से चेतावनी दी जाएगी, ताकि वे समय रहते सावधानी बरत सकें।
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NHAI के अनुसार, यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल दो राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर लागू किया गया है।
जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग
जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग
इन इलाकों को आवारा पशुओं के कारण दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
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National Highway
- फोटो : PTI
इस सेफ्टी अलर्ट सिस्टम में रिलायंस जियो की क्या भूमिका है?
इस पहल के तहत रिलायंस जियो ने अपने प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया है, ताकि देशभर में रियल-टाइम सेफ्टी अलर्ट्स भेजे जा सकें। पिछले महीने NHAI और रिलायंस जियो के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी साइन किया गया था, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर टेलीकॉम आधारित सेफ्टी अलर्ट सिस्टम लागू किया जाना है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की अचानक आवाजाही से होने वाले हादसों को रोकना है, खासकर:
कोहरे के समय
कम दृश्यता की स्थिति में
इन हालात में ड्राइवरों को समय रहते सतर्क करना इस सिस्टम का अहम हिस्सा है।
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NHAI के मुताबिक, इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत:
लोकेशन आधारित अलर्ट्स भेजे जाएंगे
हाई-रिस्क हिस्सों से करीब 10 किलोमीटर पहले चेतावनी दी जाएगी
इससे यात्रियों को सावधानी बरतने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा
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सेफ्टी अलर्ट किस तरह से भेजे जाएंगे?
ड्राइवरों तक संदेश पहुंचाने के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था अपनाई गई है।
पहले फ्लैश एसएमएस भेजा जाएगा
इसके बाद उसी संदेश का वॉइस अलर्ट मिलेगा
Flash SMS हिंदी में होगा, जिसमें लिखा होगा:
"आगे आवारा पशु ग्रस्त क्षेत्र है। कृपया धीरे और सावधानी से चलें।"
इसके बाद यही संदेश वॉइस अलर्ट के जरिए भी सुनाया जाएगा।
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National Highway
- फोटो : X/@nitin_gadkari
बार-बार अलर्ट आने से बचने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
ड्राइवरों को बार-बार एक ही चेतावनी देकर परेशान न किया जाए, इसके लिए एक ही यूजर को 30 मिनट के भीतर दोबारा अलर्ट नहीं भेजा जाएगा। इससे अलर्ट की थकान की समस्या से बचा जा सकेगा।
अलर्ट किन आधारों पर तैयार किए जाएंगे?
सेफ्टी अलर्ट्स तैयार करने के लिए:
पुराने दुर्घटना आंकड़ों का विश्लेषण
फील्ड स्तर से मिले इनपुट
का इस्तेमाल किया जाएगा।
इनके आधार पर आवारा पशुओं के लिए संवेदनशील ज़ोन चिन्हित किए गए हैं, जहां अलर्ट भेजे जाएंगे।
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NHAI ने कहा है कि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों और उसकी प्रभावशीलता का आकलन किया जाएगा। अगर यह पहल सफल रहती है तो इसे देश के अन्य आवारा पशु-प्रभावित इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
यह कदम राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
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