रेलवे की थाली में हलाला बनान झटका विवाद, NHRC का एक्शन; FSSAI और संस्कृति मंत्रालय को नोटिस जारी
देश रेलवे की थाली में हलाला बनान झटका विवाद, NHRC का एक्शन; FSSAI और संस्कृति मंत्रालय को नोटिस जारी
सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक्शन लिया है. इसके तहत रेलवे बोर्ड के साथ-साथ FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है.
Written byDheeraj Sharma
सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक्शन लिया है. इसके तहत रेलवे बोर्ड के साथ-साथ FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है.
Dheeraj Sharma 14 Jan 2026 18:27 IST
Follow Us
New Update/newsnation/media/media_files/2026/01/14/indian-railway-nonveg-food-2026-01-14-18-25-57.jpg)
भारतीय रेलवे में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर चल रहा झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक्शन लिया है. इसके तहत रेलवे बोर्ड के साथ-साथ FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा है कि यदि यात्रियों को बिना जानकारी दिए केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है.
Advertisment
सिख रहत मर्यादा से जुड़ा मामला
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे को धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि सिख धर्म की आचार संहिता, यानी सिख रहत मर्यादा, हलाल मांस के सेवन की अनुमति नहीं देती. ऐसे में यदि सिख यात्रियों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि भोजन झटका है या हलाल, तो यह उनके धार्मिक अधिकारों पर सीधा आघात है. आयोग का मानना है कि जानकारी छिपाना या अस्पष्ट रखना संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है.
पारदर्शिता की मांग, लेबलिंग अनिवार्य करने पर जोर
NHRC ने संस्कृति मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह देशभर के खाने-पीने के प्रतिष्ठानों और विशेष रूप से रेलवे से जुड़े कैटरिंग सिस्टम को निर्देश दे कि मीट के प्रकार को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए. वहीं FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज भोजन के सर्टिफिकेशन में यह साफ लिखा होना चाहिए कि मांस झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे.
रोजगार और सामाजिक प्रभाव पर भी चिंता
प्रियंक कानूनगो ने इस विवाद के एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया रोजगार का मुद्दा. उन्होंने कहा कि कुछ धार्मिक व्याख्याओं के अनुसार हलाल मांस वही माना जाता है, जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे पारंपरिक रूप से मांस व्यवसाय से जुड़े हिंदू दलित समुदायों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं. आयोग ने इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय बताया है.
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी दिए
अपने बयान में NHRC सदस्य ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि कई वैश्विक कंपनियां यात्रियों को भोजन का विकल्प देती हैं. यहां तक कि मुस्लिम देश की एयरलाइन एतिहाद भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराती है. ऐसे में भारतीय रेलवे जैसे सार्वजनिक संस्थान से भी इसी तरह की पारदर्शिता और संवेदनशीलता की उम्मीद की जा सकती है.
आगे क्या?
NHRC के नोटिस के बाद अब निगाहें रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के जवाब पर टिकी हैं. यह मामला न केवल भोजन की पसंद का है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, उपभोक्ता अधिकार और सामाजिक समानता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है.
यह भी पढ़ें - कौन है आसिया अंद्राबी, जिसे दिल्ली की अदालत ने UAPA के तहत ठहराया दोषी
INDIA
Read More
हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें!
विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनेंअब सदस्यता लें
Read the Next Article