No Stadium, No Equipment...dreams Are Flying In The Fields - Sambhal News

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संभल। केंद्र सरकार एक ओर जहां खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए तरह-तरह के जतन कर रही है। हर ब्लॉक में स्टेडियम बना रही है। वहीं सदर तहसील के गांव बारीपुर भमरौआ समेत दर्जनभर गांव ऐसे हैं, जहां प्रतिभाशाली युवाओं के सामने आधुनिक खेल सुविधाओें की कमी है। न खेलने के लिए मैदान हैं और न दौड़ने के लिए ट्रैक। जान को जोखिम में डाल वह अपनी प्रतिस्पर्धा को निखारने के लिए लिंक मार्ग को खाली मिलने वाले खेतों का सहारा ले रहे हैं। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
युवाओं का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। आज के समय में आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। गांव-गांव ओपन जिम बनाने का दावा किया गया है लेकिन संभल के गांव बारीपुर भमरौआ, कटौनी, भवांच समेत एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां इस तरह का कोई काम ही नहीं हुआ। अफसोस तो इस बात का है कि गांवों में सरकारी भूमि है लेकिन लोगों का अवैध कब्जा है। किसी ने कूड़ा डालकर कब्जा किया है तो किसी ने मकान बना लिए हैं। कुछ बची तो उसे किसानों ने ज्योत में शामिल कर लिया है। इस कारण न खेल का मैदान बचा और न ट्रैक। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह इन समस्याओं पर ध्यान दें और उन्हें खेल सुविधाएं उपलब्ध कराए। विज्ञापन विज्ञापन
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युवाओं की जुबानी
गांव में कई स्थानों पर सरकारी भूमि है, जिस पर लोगों का अवैध कब्जा है। धार्मिक स्थल भी बने हैं। खेत-खलिहान में भी सरकारी भूमि को शामिल करके जोता जा रहा है। जिस कारण खेलकूद प्रतियोगिता, दौड़ आदि के मैदान नहीं बचा। दौड़ने के लिए लिंक मार्गों का सहारा लिया जा रहा है।

टिंकू यादव, गांव बारीपुर भमरौआ।



आर्मी की तैयारी कर रहा हूं। हर रोज दौड़ता हूं लेकिन लिंक मार्ग पर जाना पड़ता है। इससे हादसे का डर बना रहता है। कई बार जिम्मेदार लोगों से कहा पर सुनवाई नहीं हो सकी।

सत्या, गांव बारीपुर भमरौआ।

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फौज में भर्ती होने का सपना है लेकिन आधुनिक सुविधाएं न मिलने से समस्या है। लिंक रोड और कहीं-कहीं खाली मिलने वाले मैदान को सहारा बनाते हैं लेकिन यह अनुकूल नहीं होते। इस कारण हादसों का भी डर बना रहता है।
जन्म सिंह, गांव कटौनी।

गांव में उपलब्ध सरकारी भूमि पर खेल सुविधाएं विकसित कराई जानी चाहिए। ताकि दौड़ने के लिए ट्रैक मिल सकें और खेलकूद के लिए मैदान। क्योंकि युवा वर्ग में जितना उत्साह है, यदि उसे कुछ भी सहूलियत मिली तो वह निश्चित निखरकर आएगा।
वीरभान सिंह, गांव भवांच।

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