...तो बच सकती थी नोएडा के इंजीनियर की जान:सड़क पर रोशनी की कमी, सफेद पट्टी थी गायब, हादसे के सात बड़े कारण - Noida Engineer Death Case Lack Of Lighting Missing White Strip On Speed Breakers Seven Reasons For Accidents

...तो बच सकती थी नोएडा के इंजीनियर की जान:सड़क पर रोशनी की कमी, सफेद पट्टी थी गायब, हादसे के सात बड़े कारण - Noida Engineer Death Case Lack Of Lighting Missing White Strip On Speed Breakers Seven Reasons For Accidents

विस्तार Follow Us

नोएडा प्राधिकरण की ओर से घटनास्थल के पास शनिवार को मिट्टी का ढेर लगवाकर और 8 फीट ऊंचे और 10 फीट चौड़े चार लोहे के बैरिकेड लगाकर रास्ते को बंद किया गया है। प्राधिकरण की ओर से घटनास्थल के पास मोड़ पर जर्सी बैरियर भी लगवाए गए हैं। इसे टीन शेड लगाकर बंद करने की जहमत नहीं उठाई गई है। इस कारण अभी भी वहां हादसे की संभावना बनी हुई है। वहीं लोगों ने कहा कि यही सतर्कता पहले दिखाई होती तो शायद यह हादसा नहीं होता।

और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

रोशनी की कमी के साथ स्पीड ब्रेकर की सफेद पट्टी गायब, हादसे के 7 कारण
1 - जिस जगह पर हादसा हुआ वहां पर मोड़ पर बेसमेंट से पहले रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड नहीं लगे हैं। 
2- मोड़ से पहले एक स्पीड ब्रेकर बना है। मगर ब्रेकर की सफेद पट्टी मिट चुकी है। 
3- स्ट्रीट लाइट की रोशनी भी कम ही रहती है। 
4- जिस बेसमेंट में हादसा हुआ है। उस बेसमेंट की खोदाई के बाद काम रुकने पर बाउंड्री वॉल की टीन शेड से बैरिकेडिंग नहीं की गई है। 
5- आसपास की सोसाइटियों से निकलने वाला पानी इस खाली प्लॉट में छोड़ा जाता है।
6-  खाली प्लॉट वाले बेसमेंट में झाड़ियां भी उग आई हैं। 
7- क्षतिग्रस्त सीवर लाइन होने के कारण इसका पानी ओवर फ्लो होकर प्लॉट में भरता है। 

विज्ञापन विज्ञापन

नाले के किनारे कई ऐसे स्थान हैं, जहां बेसमेंट खुले
स्थानीय निवासी विवेक कुमार ने प्राधिकरण द्वारा किए गए इंतजाम नाकाफी है। उन्होंने बताया कि घटना स्थल के साथ ही सेक्टर में अभी भी नाले के किनारे कई ऐसे स्थान हैं, जहां बेसमेंट खुले हुए है। इन गड्ढों में आसपास की सोसाइटी से आने वाले पानी के कारण हर समय जलभराव होता हैं। जहां किसी भी समय हादसा हो सकता है। स्थानीय निवासी सुधीर सिंह ने बताया कि क्रेन बुलाकर जो बैरिकेड लगाए गए हैं। वह सुरक्षा के लिहाज से नाकाफी है। यहां स्थायी इंतजाम किए जाने की जरूरत है। बेसमेंट के चारों ओर जरूरी है कि बाउंड्री वाल की जाए। निवासी विनाता ने बताया कि सभी लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट लिए हैं।

मगर सुविधा और सुरक्षा के नाम पर शून्य है। सेक्टर-150 में कई स्ट्रीट लाइटें खराब है। साथ ही सड़क भी टूटी हुई है। सुरक्षा में आए दिन चूक होती रहती है। वहीं निवासी विवेक ने बताया कि अगर ट्रक हादसे वाली घटना के बाद जिम्मेदारों ने सबक लेकर वहां बैरिकेड्स और रिफ्लेक्टर की व्यवस्था की होती तो शायद युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान नहीं जाती।

नाले की गहराई करीब 10 फीट
सेक्टर-150 में खुले नाले की गहराई करीब 10 फीट है। बेसमेट के पीछे वाला रास्ता भी जर्जर है। यहां की सड़क भी धंस चुकी है। इसके साथ ही वहां पूरे दिन डंपर निकले हैं। इसके साथ ही मोमनाथल जाने के लिए भी इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। मगर रास्ते को सही करने की कोई सुध नहीं ली गई है। पीछे वाले रास्ते पर भी नाले की बाउंड्री वॉल टूटकर गिर चुकी है। इस कारण सड़क धस गई है। यहां से पूरे दिन डंपर निकलते हैं। बेसमेंट में झाड़ियां उग आई हैं। इस कारण हादसे का खतरा बना रहता है। करीब ढाई साल से निर्माण बंद है। भूखंड के पास में एक अर्थम बिल्डर्स का कार्यालय है।

बाशिंदें बोले- अगर टीन शेड के साथ बैरिकेडिंग-रिफ्लेक्टर होते तो बच जाती जान
निवासियों का कहना है कि अगर टीन शेड के साथ बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, उचित प्रकाश और स्पीड ब्रेकर की पट्टी होती तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान बच सकती थी।

हिंडन नदी में पानी छोड़ने पर रोक बिल्डर बेसमेंट में भर रहे पानी
सेक्टर-150 में 50 से अधिक सोसाइटी हैं। 20 से अधिक सोसाइटी में 10 हजार से अधिक लोग रहते भी हैं। यहां कई जगह स्ट्रीट लाइटें भी खराब हैं। सड़क भी टूटी हुई है। सोसाइटी से निकलने वाले पानी के लिए उचित निकासी की व्यवस्था नहीं है। सोसाइटियों के पीछे से निकलने वाली हिंडन नदी में पानी छोड़ने पर मनाही है। इस कारण बिल्डर की ओर से कई सोसाइटियों से बिना शोधित किए ही पानी को खुले नाले और खाली प्लॉट में छोड़ा जाता है। 

सोसाइटी के आसपास कई बिल्डरों ने निर्माण के लिए बेसमेंट की खोदाई करवाकर छोड़ दी है। मुख्य सड़क से सटे नाले के बाद प्लॉट के बेसमेंट को ढकने के लिए टीन शेड की भी व्यवस्था नहीं की गई है। करीब 30 फीट गहरे बेसमेंट के कारण हादसे की आशंका बनती है। खाली बेसमेंट में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। इन जगहों पर कोई चेतावनी बोर्ड भी नही लगे हैं।

View Original Source