नोएडा में इंजीनियर की गड्‌ढ़े में डूबने से मौत पर भड़का आक्रोश, कैंडल मार्च; लोगों ने बताया- डेथ जोन - noida outrage erupts after engineer drowns in pit candle march held people call area death zone

नोएडा में इंजीनियर की गड्‌ढ़े में डूबने से मौत पर भड़का आक्रोश, कैंडल मार्च; लोगों ने बताया- डेथ जोन - noida outrage erupts after engineer drowns in pit candle march held people call area death zone
सोबिंद्र भाटी, नोएडा:

उत्तर प्रदेश के नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला गरमा गया है। युवराज की अपार्टमेंट के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्‌ढ़े में कार समेत गिरकर डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस मामले के सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। नोएडा के सेक्टर-150 स्थित ली ग्रैडिओस मोड़ पर हुए दर्दनाक हादसे ने अधिकारियों की लापरवाही उजागर की है। यहां की सोसायटियों के लोगों में आक्रोश रविवार को भी साफ देखा गया। उन्होंने हंगामा किया और आरोप लगाया कि पुलिस, प्रशासन एवं नोएडा अथॉरिटी के अधिकारी लपरवाह न होते और 15 दिन पहले हुए ट्रक हादसे के बाद भी कदम उठा लेते तो इंजीनियर की जान न जाती।

घटनास्थल पर रविवार को आसपास की सोसायटियों के लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। रविवार को टाटा यूरेका पर्क सोसायटी के निवासियों ने कैंडल मार्च निकाला। सोसायटी निवासियों का कहना है कि मोड़ पर प्राधिकरण की ओर से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो स्पीड ब्रेकर, बैरकेटिंग, रिफ्लेक्टर, दिशा-सूचक बोर्ड और न ही रेड लाइट लगाई गईं थी।

क्या कहते हैं लोग?

सोसायटी निवासी पंकज ने कहा कि अगर पुलिस प्रशासन समय पर तत्परता दिखाता तो मेरे दोस्त की जान बचाई जा सकती थी। मौके पर देरी और लापरवाही के कारण हालात और बिगड़ गए। शैकी त्यागी ने बताया कि यह गड्डा अब 'डेथ जोन' बन चुका है। बेसमेंट के लिए खोदा गया यह गड्डाअब पानी से भरा हुआ है और बिल्डर की ओर से कोई काम नहीं चल रहा।

श्वेता कक्कड़ ने कहा कि मोड़ पर 90 डिग्री का मोड़ कोहरे के कारण दिखाई नहीं देता। अखिलेश ने बताया कि गड्‌ढ़े के पास कोई दीवार नहीं बनी है और रोड के बाद सीधा गहरे पानी भरा हुआ गड्ढ़ा है। यह राहगीरों और वाहन चालकों के लिए अत्यंत खतरनक है।

हादसे से पहले दोस्तों को छोड़ा था घर

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि घटना वाली रात गुड़गांव से निकलते समय बेटे ने उनसे फोन पर बात की थी। रास्ते में उसने अपने दो दोस्तों को नोएडा छोड़ा। उसके नोएडा पहुंचने पर भी बातचीत हुई थी। इसके बाद उसके गड्‌ढ़े में कार के साथ गिरने की बात सामने आई।

बैरिकेडिंग कर खानापूर्ति

हादसे के दो दिन बाद रविवार को लोगों के आक्रोश के बीच पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी अचानक सक्रिय तो दिखाई दिए, लेकिन लोगों ने इसे खानापूर्ति बताया है। प्रशासन ने शनिवार को घटनास्थल के पास मलबा डाल दिया था। रविवार को अस्थायी बैरिकेडिंग लगाई और औपचारिकता पूरी कर टीम वापस लौट गई।

लोगों का आरोप है कि बैरिकेडिंग पर भी रिफलेक्टिंग टेप नहीं लगाई है जो अंधरे और कोहरे में दिख सके। टाटा यूरेका पार्क सोसायटी के निवास अमित शुक्ला ने कहा कि पुलिस और प्राधिकरण इस गंभीर हादसे को हल्के में ले रहे हैं।

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