परदेस में बसे भारतीयों का देशप्रेम, जड़ों से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ, विदेश में ऐसे निभाते हैं भाईचारा - nri day 2026 why do indians want to move abroad why nris returning back to india more than before

परदेस में बसे भारतीयों का देशप्रेम, जड़ों से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ, विदेश में ऐसे निभाते हैं भाईचारा - nri day 2026 why do indians want to move abroad why nris returning back to india more than before

रोजी-रोटी की तलाश और बेहतर भविष्य के लिए लाखों लोग भारत से विदेशों में बस गए। लेकिन दूर रहकर भी उनका देशप्रेम कम नहीं हुआ। विदेशों में बसे भारतीय देश और देशवासियों से जुड़ने का कोई मौका नहीं चूकते। ‘एनआरआई कनेक्ट’ सीरीज में हम आपको ऐसी महिला से मिला रहे हैं जो देश से दूर रहकर भी देश से हमेशा जुड़ी रहती हैं।

एनआरआई दिवस क्या है?

एनआरआई दिवस क्या है?

एनआरआई दिवस एक ऐसा अवसर है जो भारत सरकार और प्रवासी भारतीयों को एक साथ जोड़ता है। विदेश मंत्रालय इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वभर में फैले एनआरआई का नेटवर्क बनाने के लिए करता है। यह एक ऐसा मंच प्रदान करता है जहां प्रवासी अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और सरकार उनकी जरूरतों को समझ सकती है।

यह दिन अपनेपन की भावना बढ़ाता है। विदेशों में रहने वाले लाखों भारतीयों को याद दिलाता है कि वे भारत के विकास का अभिन्न अंग हैं। यह ऐसा मौका है जो भारत के लोगों के माध्यम से भारत और अन्य देशों के बीच संबंध स्थापित करने में मदद करता है।

एनआरआई दिवस क्यों मनाया जाता है?

एनआरआई दिवस क्यों मनाया जाता है?

9 जनवरी 1915 के दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उनका लौटना देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। महात्मा गांधी पहले ऐसे प्रवासी थे जो देश को आजादी दिलाने के लिए वापस लौटे थे। उनकी देश वापसी ने सिखाया कि विदेशों में प्राप्त अनुभवों का उपयोग मातृभूमि के परिवर्तन में कैसे किया जा सकता है। तब से 9 जनवरी के दिन प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है।

विदेश में बसना आसान नहीं

विदेश में बसना आसान नहीं

शादी के बाद रश्मि मिश्रा को पति के साथ यूके यानी ब्रिटेन जाना पड़ा। वो पति के साथ परदेस चली तो गईं, लेकिन वहां उनका जरा भी मन नहीं लगा। यूके में कई दिनों तक धूप नहीं खिलती। ऐसे में घर में अकेलापन दिल-दिमाग को सुन्न कर देता है। यूके में रश्मि जैसे घर में कैद होकर रह गईं। ज्यादातर भारतीय महिलाएं विदेश में घर में कैद होकर रह जाती हैं। उनके पास दिल की बात कहने सुनने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में खुद आगे बढ़कर लोगों से मिलना जरूरी है।

महिलाओं का दर्द समझा

महिलाओं का दर्द समझा

समय के साथ रश्मि ने खुद को बदला। घर में कैद रहने की बजाय लोगों से संपर्क करना शुरू किया। इससे रश्मि को कई लोग जानने लगे। रश्मि अपने जैसी महिलाओं का अकेलापन दूर करना चाहती थीं। उन्होंने एक ऐसा ग्रुप बनाया जहां हर महिला अपनी स्थिति के बारे में बता सकती है। अगर उसे किसी चीज की जरूरत हो तो वह ग्रुप में मैसेज करके मदद मांग सकती है। ये ग्रुप यूके में बसी भारतीय महिलाओं के बहुत काम आ रहा है। इस ग्रुप का सिस्टर्स सपोर्ट ग्रुप 24 घंटे महिलाओं के लिए उपलब्ध रहता है।

विदेश में देशप्रेम कम नहीं हुआ

विदेश में देशप्रेम कम नहीं हुआ

रश्मि के ग्रुप को इस काम के लिए कई लोग सपोर्ट करते हैं। इन्हें हाई कमीशन ऑफ इंडिया का भी सपोर्ट मिलता है। हाल ही में भारत के दिवाली सेलिब्रेशन को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया। ये प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। रश्मि मिश्रा के ग्रुप को जन कल्याण के लिए जब अच्छी राशि मिलती है तो इसका उपयोग वो भारत के गरीब बच्चों और जरूरतमंद महिलाओं के लिए भी करती हैं। परदेस में रह कर भी रश्मि का देश के लिए प्यार कम नहीं हुआ।

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