प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं, लेकिन यह अपने आप में; NSA अजित डोभाल ने युवाओं से की ये अपील - nsa ajit doval noted to youth we have to avenge our history and make india strong in every field

प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं, लेकिन यह अपने आप में; NSA अजित डोभाल ने युवाओं से की ये अपील - nsa ajit doval noted to youth we have to avenge our history and make india strong in every field

नई दिल्ली : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने शनिवार को युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर मजबूत नहीं करनी है, बल्कि आर्थिक और तकनीकी तौर पर भी देश को इतना मजबूत बनाना है कि हमलों और पराधीनता के अपने इतिहास का प्रतिशोध ले सकें। डोभाल 'विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद' के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्षों, भारत की सभ्यता पर हुए हमलों और मजबूत नेतृत्व के महत्व का जिक्र किया ।

'मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ'

उन्होंने तीन दिवसीय इस आयोजन में भाग ले रहे देश भर के तीन हजार युवाओं से कहा कि मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था। आप भाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र भारत में पैदा हुए। सदियों तक हमारे पूर्वजों ने इसके लिये बहुत कुर्बानियां और अपमान सहे हैं। भगत सिंह को फांसी हुई, सुभाष चंद्र बोस को जीवन भर संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और अनगिनत लोगों को जानें देनी पड़ीं।

भारत के खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख 81 वर्षीय डोभाल ने कहा कि हमारे गांव जले, हमारी सभ्यता को समाप्त किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम एक मूक दर्शक की तरह असहाय होकर देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि भारत के हर युवक के अंदर आग होनी चाहिये ।''

प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन...

उन्होंने कहा कि प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और हमें इस देश को फिर वहां पहुंचाना है, जहां हम अपने हक, अपने विचार और अपनी आस्थाओं के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें। हमें अपने आपको हर रूप में आर्थिक, रक्षात्मक, तकनीकी तौर मजबूत बनाना है ।

डोभाल ने कहा कि हमारी एक बड़ी विकसित सभ्यता थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े और कहीं जाकर लूटा नहीं। हमने दूसरे देशों पर आक्रमण नहीं किया, परंतु हम अपनी सुरक्षा और उस पर खतरों के प्रति उदासीन रहे, तो हमें इतिहास ने एक सबक सिखाया। क्या हमने वह सबक सीखा और क्या उसे याद रखेंगे। अगर आने वाली पीढियां उस सबक को भूल जायेंगी, तो यह इस देश की सबसे बड़ी त्रासदी होगी।''

पीएम मोदी का दिया उदाहरण

कार्यक्रम में भाग ले रहे युवाओं को 'भविष्य का नेता' बताते हुए उनसे इच्छाशक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता के विकास का आह्वान करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण दिया । उन्होंने कहा,'' आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि देश में एक ऐसा नेतृत्व है, जिसने दस साल में देश को कहां से कहां पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता, मेहनत, अनुशासन और समर्पण सभी के लिये आदर्श है। मोदीजी के पास इतने नये विचार रहते हैं, जो इच्छाशक्ति और समर्पण से आता है। आप भाग्यवान हैं कि उस भारत को देखेंगे, जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं।''

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